सोमनाथ मंदिर पर हमले के 1000 साल: ‘गजनी-औरंगजेब सब दफन, सोमनाथ आज भी अडिग’: पीएम मोदी
“सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले के 1000 वर्ष पूरे होने पर गुजरात के गिर सोमनाथ में स्वाभिमान पर्व आयोजित हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि गजनी और औरंगजेब इतिहास में दफन हो गए, लेकिन सोमनाथ मंदिर आज भी शान से खड़ा है और भारत की सभ्यतागत शक्ति का प्रतीक है।”
नई दिल्ली / गिर सोमनाथ। सोमनाथ मंदिर पर हुए ऐतिहासिक आक्रमण के 1000 वर्ष पूरे होने के अवसर पर गुजरात के गिर सोमनाथ जिले में रविवार को ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का भव्य आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अवसर पर आयोजित शौर्य यात्रा का नेतृत्व किया और मंदिर में पूजा-अर्चना कर देश को संबोधित किया।
प्रधानमंत्री ने कहा,
“गजनी, औरंगजेब जैसे आक्रांता इतिहास के पन्नों में दफन हो चुके हैं, लेकिन सोमनाथ मंदिर आज भी उतना ही अडिग, उतना ही भव्य और उतना ही गौरवशाली खड़ा है।”
108 अश्वों की शौर्य यात्रा, वीरों को श्रद्धांजलि
स्वाभिमान पर्व के तहत निकाली गई शौर्य यात्रा में 108 अश्वों की झांकी शामिल रही, जो वीरता, बलिदान और संघर्ष का प्रतीक है। यात्रा मार्ग पर हजारों श्रद्धालु प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए उमड़े। पीएम मोदी ने वीर हमीरजी गोहिल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की, जिन्होंने 1299 ईस्वी में सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे।
‘सोमनाथ का इतिहास विनाश नहीं, विजय का है’
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा,
“सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का नहीं, बल्कि विजय और पुनर्निर्माण का इतिहास है। सदियों तक आक्रमण होते रहे, लेकिन हर बार यह मंदिर और अधिक शक्ति के साथ खड़ा हुआ।”
उन्होंने कहा कि विश्व इतिहास में 1000 वर्षों के इस संघर्ष की कोई तुलना नहीं मिलती, और यह भारत की सभ्यतागत निरंतरता का प्रमाण है।
पुनर्निर्माण का विरोध करने वाली ताकतों पर तीखा प्रहार
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज़ादी के बाद जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया, तब भी कुछ ताकतों ने इसका विरोध किया।
“दुर्भाग्य से ऐसी ताकतें आज भी सक्रिय हैं। हमें सतर्क, एकजुट और शक्तिशाली रहकर उन्हें परास्त करना होगा।”
उन्होंने कहा कि आज तलवारों की जगह साजिशों ने ले ली है, लेकिन भारत को बांटने वाली हर ताकत को हराया जाएगा।
भारत की आत्मा और स्वाभिमान का प्रतीक
पीएम मोदी ने कहा कि
“सोमनाथ की कहानी भारत की कहानी है। आक्रमणकारियों ने सोचा कि मंदिर तोड़कर वे जीत गए, लेकिन 1000 साल बाद भी सोमनाथ का ध्वज भारत की शक्ति का उद्घोष कर रहा है।”
उन्होंने यह भी कहा कि यह स्वाभिमान पर्व आने वाली पीढ़ियों के लिए सांस्कृतिक चेतना और आत्मगौरव की प्रेरणा बनेगा।




