यूपी में कांग्रेस का विरोध-प्रदर्शन, CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर बढ़ी सियासी तकरार

UP में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन। कानपुर, बांदा और प्रयागराज में विरोध-प्रदर्शन, ‘वोट चोरी’ के आरोप और बीजेपी के जवाब समेत पूरी खबर पढ़ें।
लखनऊ/कानपुर/बांदा/प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का विरोध-प्रदर्शन सोमवार को कई शहरों में देखने को मिला। कांग्रेस ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और लोकतंत्र की रक्षा के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन किया। कानपुर, बांदा और प्रयागराज में पार्टी कार्यकर्ताओं ने विरोध-प्रदर्शन, नारेबाजी और मार्च किया।
यह विरोध उस व्यापक राजनीतिक विवाद के बीच हुआ है जिसमें कांग्रेस निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर सवाल उठा रही है। वहीं, बीजेपी और उसके नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए निर्वाचन आयोग के फैसलों और प्रक्रिया का बचाव किया है।
कानपुर में प्रदर्शन, CEC और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी
कानपुर में ग्रामीण कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में ‘वोट चोर’ लिखे पोस्टर और पर्चे थे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट परिसर के घेराव का प्रयास किया।
कांग्रेस की ओर से चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची से जुड़े सवालों को उठाया गया। प्रदर्शन के दौरान CEC ज्ञानेश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पुतले जलाए जाने की बात भी सामने आई है।
बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों पर किया पलटवार
कांग्रेस के प्रदर्शन पर बीजेपी ने पलटवार किया। बीजेपी नेताओं का कहना है कि कांग्रेस चुनावी हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रही है।
हालिया बयान में यूपी बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने निर्वाचन आयोग के 26 सितंबर के संयुक्त बयान का हवाला देते हुए कहा कि आयोग के प्रमुख फैसले, जिनमें SIR भी शामिल है, तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे। बीजेपी का तर्क है कि विपक्ष निर्वाचन आयोग को लेकर भ्रम पैदा कर रहा है।
बांदा में कांग्रेस का जुलूस, पुतला फूंका
बांदा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला कांग्रेस कार्यालय से कचहरी क्षेत्र तक जुलूस निकाला। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की और विरोध स्वरूप पुतला फूंका।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच नोकझोंक की स्थिति भी सामने आई। कांग्रेस ने चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता और मतदाता के अधिकारों से जुड़े सवाल उठाए।
प्रयागराज में भी कांग्रेस का प्रदर्शन
प्रयागराज में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बालसन चौराहे पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने धरना दिया। इसके बाद कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट की ओर मार्च करते हुए आगे बढ़े।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंके जाने की भी जानकारी सामने आई है।
विवाद की बड़ी वजह क्या है?
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक टकराव पिछले कुछ दिनों में और तेज हुआ है। कांग्रेस निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर गंभीर आरोप लगा रही है। वहीं निर्वाचन आयोग ने अपने हालिया स्पष्टीकरण में आयोग के भीतर मतभेदों से संबंधित रिपोर्टों पर कहा है कि विभिन्न मुद्दों पर चर्चा और असहमति लोकतांत्रिक संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती है तथा अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस इससे पहले भी CEC के खिलाफ प्रदर्शन कर चुकी है। 25 सितंबर को लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। भारी बारिश के बीच हुए उस प्रदर्शन में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनातनी भी हुई थी।
मेरठ और वाराणसी के कार्यक्रम भी चर्चा में
इसी राजनीतिक विवाद के बीच CEC ज्ञानेश कुमार के उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित युवा मतदाता जागरूकता कार्यक्रम भी चर्चा में रहे। रिपोर्टों के अनुसार मेरठ और वाराणसी में होने वाले कार्यक्रमों को स्थगित किया गया। निर्वाचन आयोग की ओर से बताया गया कि कार्यक्रमों की तारीखों में बदलाव विभिन्न प्रशासनिक और लॉजिस्टिक कारणों से हुआ, और इसे SIR विवाद से जोड़ना उचित नहीं है।
आगे क्या?
CEC ज्ञानेश कुमार, निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर कांग्रेस तथा बीजेपी के बीच राजनीतिक बयानबाजी जारी है। कांग्रेस जहां चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े अपने सवालों को लेकर आंदोलन कर रही है, वहीं बीजेपी निर्वाचन आयोग के स्पष्टीकरण और संयुक्त बयान को आधार बनाकर कांग्रेस के आरोपों को खारिज कर रही है।
इस पूरे विवाद में कांग्रेस के आरोपों और बीजेपी/निर्वाचन आयोग के जवाब को अलग-अलग समझना महत्वपूर्ण है। उपलब्ध रिपोर्टों में लगाए गए आरोप राजनीतिक दावे हैं; उन्हें स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।




