लखनऊ: ISI समर्थित शहजाद भट्टी नेटवर्क पर बड़ा प्रहार, यूपी में 62 संदिग्ध हिरासत में

शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई में 14 राज्यों से 253 संदिग्ध हिरासत में लिए गए। यूपी में 62 लोगों पर कार्रवाई, 80+ FIR और 200+ गिरफ्तारियां सामने आईं। IED, ग्रेनेड, पिस्टल और CCTV उपकरण बरामद किए गए।
लखनऊ। शहजाद भट्टी नेटवर्क (Shahzad Bhatti Network) के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ा बहु-राज्यीय अभियान चलाकर कथित आतंकी नेटवर्क की कमर तोड़ने का दावा किया है। स्वतंत्रता दिवस से पहले 12 अगस्त को चलाए गए समन्वित अभियान में 14 राज्यों से 253 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि नेटवर्क से जुड़े मामलों में अब तक 80 से अधिक FIR और 200 से ज्यादा गिरफ्तारियों की जानकारी सामने आई है।
इस कार्रवाई में उत्तर प्रदेश सबसे आगे रहा, जहां 62 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी गई है। इसके बाद हरियाणा में 52, दिल्ली में 51 और पंजाब में 44 लोगों पर कार्रवाई हुई। राजस्थान में 15, महाराष्ट्र में 8 और उत्तराखंड में 5 लोगों को हिरासत में लिया गया। कर्नाटक, गुजरात और बिहार में तीन-तीन तथा तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और केरल में दो-दो लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है।
सोशल मीडिया से युवाओं को जोड़ने का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तान स्थित गैंगस्टर शहजाद भट्टी से जुड़े नेटवर्क पर सोशल मीडिया के जरिए भारतीय युवाओं को संपर्क में लाने, उन्हें कथित तौर पर कट्टरपंथ की ओर धकेलने और आगे अलग-अलग आपराधिक एवं आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल करने के आरोप हैं।
उत्तर प्रदेश में इससे पहले ATS और STF की कार्रवाई में भी ऐसे संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई थी। मई 2026 में सहारनपुर से चार संदिग्धों की गिरफ्तारी के मामले में एजेंसियों ने आरोप लगाया था कि सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के जरिए युवाओं की भर्ती तथा संवेदनशील ठिकानों की रेकी कराने की कोशिश की जा रही थी।
जून में आजमगढ़ से एक व्यक्ति की गिरफ्तारी के मामले में भी UP ATS ने आरोप लगाया था कि नेटवर्क सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को जोड़कर कथित स्लीपर सेल तैयार करने की कोशिश कर रहा था।
IED, ग्रेनेड और हथियारों की बरामदगी
सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई के दौरान IED, पिस्टल, जिंदा कारतूस और पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री की मार्किंग वाले ग्रेनेड बरामद किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा जासूसी और निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले CCTV उपकरण भी मिलने की बात सामने आई है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, नेटवर्क पर भारत में ग्रेनेड, IED और पेट्रोल बम हमलों तथा टारगेट किलिंग जैसी गतिविधियों से जुड़े होने के आरोप हैं। साथ ही पुलिस, रक्षा प्रतिष्ठानों और धार्मिक स्थलों की रेकी कराए जाने का भी आरोप सामने आया है।
14 राज्यों में एक साथ ऑपरेशन
12 अगस्त को चलाए गए अभियान में राज्य पुलिस बलों के साथ रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। इसका उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस के आसपास संभावित विध्वंसक गतिविधियों को रोकना और नेटवर्क से जुड़े संदिग्धों तक पहुंच बनाना था।
इस अभियान में उत्तर प्रदेश के अलावा हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, कर्नाटक, गुजरात, बिहार, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और केरल में कार्रवाई की गई।
52 और 62 के आंकड़े में क्या अंतर?
यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य समझना जरूरी है। अलग-अलग चरणों की कार्रवाई में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। आपके दिए गए ETV Bharat अपडेट में 12 FIR के तहत 52 संदिग्धों की गिरफ्तारी का उल्लेख है। वहीं 12 अगस्त को 14 राज्यों में चलाए गए व्यापक अभियान के आधिकारिक रूप से रिपोर्ट किए गए आंकड़े में उत्तर प्रदेश से 62 लोगों को हिरासत में लेने की जानकारी दी गई है। इसलिए दोनों आंकड़ों को एक ही कार्रवाई का आंकड़ा मानना सही नहीं होगा।
UAPA के तहत कार्रवाई की तैयारी
उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा शहजाद भट्टी नेटवर्क और उसके सक्रिय सदस्यों के खिलाफ UAPA के तहत कार्रवाई की दिशा में केंद्र सरकार को पत्र भेजे जाने की बात भी सामने आई है। हालांकि किसी नेटवर्क या व्यक्ति को औपचारिक रूप से आतंकवादी संगठन अथवा आतंकवादी घोषित करने की अंतिम कानूनी प्रक्रिया केंद्र सरकार के स्तर पर होती है।
इस पूरे मामले में जांच एजेंसियां नेटवर्क के कथित सीमा-पार संपर्क, फंडिंग, डिजिटल कम्युनिकेशन, स्थानीय सहयोगियों और संभावित स्लीपर सेल की भूमिका की जांच कर रही हैं।
यूपी क्यों बना अहम केंद्र?
उत्तर प्रदेश की बड़ी आबादी, विशाल भौगोलिक क्षेत्र और सोशल मीडिया की व्यापक पहुंच के कारण सुरक्षा एजेंसियां डिजिटल रेडिकलाइजेशन और स्लीपर सेल नेटवर्क को लेकर विशेष सतर्कता बरत रही हैं। हाल के महीनों में UP ATS की कई कार्रवाइयों में शहजाद भट्टी से कथित तौर पर जुड़े लोगों की गिरफ्तारी सामने आई है।
सुरक्षा एजेंसियों का फोकस अब केवल किसी एक आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि कथित नेटवर्क की भर्ती, फंडिंग, हथियारों की सप्लाई, रेकी और डिजिटल संपर्क की पूरी कड़ी का पता लगाने पर है।




