सपा के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी का निधन, अखिलेश यादव ने दी भावुक श्रद्धांजलि; बोले- ‘महान समाजवादी प्रकाश-स्तंभ अब हमारे बीच नहीं’

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी का 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। अखिलेश यादव ने उन्हें समाजवादी आंदोलन का प्रकाश-स्तंभ बताते हुए भावुक श्रद्धांजलि दी।
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी का शुक्रवार रात लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में निधन हो गया। वह 74 वर्ष के थे। वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे और एसजीपीजीआई में उनका उपचार चल रहा था। उनके निधन की पुष्टि संस्थान के निदेशक डॉ. आरके धीमन ने की।
राम गोविंद चौधरी के निधन की खबर सामने आते ही समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई। बलिया समेत प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में उनके समर्थकों और राजनीतिक सहयोगियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
अखिलेश यादव ने बताया ‘समाजवादी प्रकाश-स्तंभ’
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम गोविंद चौधरी के निधन पर भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने अपने शोक संदेश में चौधरी को समाजवादी आंदोलन का महत्वपूर्ण मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि उनके निधन से पार्टी और समाजवादी आंदोलन को बड़ी क्षति हुई है।
अखिलेश यादव ने उन्हें ‘महान समाजवादी प्रकाश-स्तंभ’ बताते हुए कहा कि उन्होंने जयप्रकाश नारायण और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की अगुवाई में समाजवादी मूल्यों, सिद्धांतों और लक्ष्यों की मशाल को आगे बढ़ाया।
अखिलेश के मुताबिक, चौधरी ने ऐसे समय में भी समाजवादी विचारधारा का साथ नहीं छोड़ा, जब विधानसभा में सपा के विधायकों की संख्या 50 से भी कम थी। उनके संसदीय तर्कों और सदन में उठाई गई आवाज को गंभीरता से सुना जाता था।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
राम गोविंद चौधरी का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ था। बलिया की धरती से निकलकर उन्होंने छात्र आंदोलन और समाजवादी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई। बाद में वह उत्तर प्रदेश की विधानसभा तक पहुंचे और कई दशकों तक सक्रिय राजनीति में रहे।
वह आठ बार विधायक चुने गए। समाजवादी पार्टी की सरकारों में उन्होंने मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारियां संभालीं। वर्ष 2017 से 2022 तक वह उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे।
मुलायम सिंह यादव के साथ भी रहा लंबा राजनीतिक जुड़ाव
राम गोविंद चौधरी का समाजवादी आंदोलन और मुलायम सिंह यादव के साथ भी लंबे समय तक राजनीतिक जुड़ाव रहा। अखिलेश यादव ने अपने श्रद्धांजलि संदेश में इस संबंध को याद करते हुए कहा कि चौधरी और ‘नेताजी’ समाजवादी संकल्पों की पूर्ति के संघर्ष में साथ रहे।
चौधरी की पहचान केवल एक विधायक या मंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि समाजवादी विचारधारा से जुड़े वरिष्ठ नेता के रूप में भी रही। उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठन में भूमिका को पार्टी के भीतर महत्वपूर्ण माना जाता रहा।
2017 से 2022 तक रहे नेता प्रतिपक्ष
राम गोविंद चौधरी ने 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान सदन में उन्होंने विपक्ष की ओर से विभिन्न मुद्दे उठाए। उनके लंबे राजनीतिक अनुभव के कारण विधानसभा की कार्यवाही में उनके तर्कों और हस्तक्षेप को विशेष महत्व मिलता था।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, वह बलिया की बांसडीह विधानसभा सीट से कई बार विधायक रहे और सपा सरकारों में मंत्री भी रहे। पार्टी संगठन में भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
सामाजिक न्याय और जनसरोकारों को लेकर सक्रिय रहे
अखिलेश यादव ने अपने संदेश में राम गोविंद चौधरी के सामाजिक न्याय और जनसरोकारों से जुड़े राजनीतिक काम को भी याद किया। उन्होंने कहा कि चौधरी ने संवैधानिक, लोकतांत्रिक और समाजवादी मूल्यों के साथ स्वतंत्रता, समानता और मानवीय गरिमा के लिए संघर्ष की सीख दी।
उनकी राजनीति में आम लोगों और जमीन से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात भी अखिलेश यादव ने कही। सपा अध्यक्ष ने उनके राजनीतिक जीवन को आने वाली पीढ़ियों के लिए सीख और प्रेरणा का स्रोत बताया।
अखिलेश यादव ने पार्थिव शरीर पर अर्पित किए पुष्प
राम गोविंद चौधरी के पार्थिव शरीर पर समाजवादी पार्टी का झंडा रखा गया। अखिलेश यादव ने उनके अंतिम दर्शन किए और पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान पार्टी के नेता, कार्यकर्ता, समर्थक और उनके परिचित भी मौजूद रहे।
अखिलेश यादव ने अपने संदेश में कहा कि अब पार्टी के लोगों की जिम्मेदारी है कि वरिष्ठ समाजवादी नेताओं के विचारों और उनके अधूरे लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए एकजुट होकर काम करें।
करीब पांच दशक लंबा रहा राजनीतिक जीवन
राम गोविंद चौधरी का राजनीतिक जीवन करीब पांच दशक तक चला। छात्र राजनीति से लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और मंत्री पद तक उन्होंने अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं। उनके निधन के बाद समाजवादी पार्टी के नेताओं के साथ-साथ विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी शोक व्यक्त किया।
बलिया से निकले इस वरिष्ठ समाजवादी नेता के निधन को पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण क्षति के रूप में देखा जा रहा है। उनके लंबे राजनीतिक सफर और समाजवादी आंदोलन से जुड़े योगदान को आने वाले दिनों में भी याद किया जाएगा।



