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उत्तर प्रदेश में बंदरों का आतंक: हाईकोर्ट के आदेश के बाद वन विभाग एक्शन में

Wildlife Institute of India की मदद से उत्तर प्रदेश में बंदरों के आतंक पर काबू पाने के लिए वैज्ञानिक सर्वे और नई कार्ययोजना तैयार की जाएगी, हाईकोर्ट के निर्देश के बाद कार्रवाई तेज।

UP Monkey Menace: उत्तर प्रदेश में बंदरों के बढ़ते आतंक से परेशान लोगों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।

 WII करेगा वैज्ञानिक अध्ययन

शासन ने बंदरों की समस्या के समाधान के लिए Wildlife Institute of India (देहरादून) की मदद लेने का फैसला किया है। यह संस्थान पूरे प्रदेश में बंदरों की संख्या, उनके व्यवहार और नुकसान का वैज्ञानिक सर्वे करेगा।

 वन विभाग को मिली जिम्मेदारी

अब बंदरों के प्रबंधन और नियंत्रण की पूरी जिम्मेदारी वन विभाग को सौंपी गई है। पहले इस मुद्दे पर नगर निगम और वन विभाग के बीच जिम्मेदारी को लेकर विवाद था, लेकिन हाईकोर्ट के निर्देश के बाद स्थिति स्पष्ट हो गई है।

 क्या होंगे प्रमुख कदम?

  • बंदरों की वैज्ञानिक गणना (Survey)
  • पकड़े गए बंदरों को आरक्षित जंगलों में छोड़ा जाएगा
  • फलदार पेड़ों वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता
  • वानर वन (Monkey Forest) बनाने की योजना
  • नसबंदी (Sterilization) के वैज्ञानिक उपाय

 धार्मिक स्थलों पर विशेष फोकस

अध्ययन में उन जिलों और धार्मिक स्थलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां बंदरों की संख्या ज्यादा है, जैसे:

  • मथुरा
  • गाजियाबाद

चुनौतियां भी कम नहीं

वन विभाग के सामने कई चुनौतियां हैं—

  • प्रशिक्षित टीमों की कमी
  • बंदर पकड़ने के संसाधनों का अभाव
  • पारंपरिक पकड़ने वाले लोगों का अभाव

इन समस्याओं को दूर करने के लिए भी योजना में विशेष प्रावधान किए जा रहे हैं।

 अगली सुनवाई पर नजर

इस पूरे मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट में 6 अप्रैल को अगली सुनवाई होगी, जहां प्रगति रिपोर्ट पेश की जाएगी।

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