SIR विवाद में CM योगी की एंट्री, बोले- चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी, विपक्ष फैला रहा भ्रम
लखनऊ में प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने SIR को लेकर विपक्ष की आलोचना की। उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर उठाए जा रहे सवालों को गैरजिम्मेदाराना बताया और कहा कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैलाने से लोकतांत्रिक संस्थाओं पर असर पड़ता है।
लखनऊ में प्रेस वार्ता के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने SIR विवाद पर विपक्ष के रुख की आलोचना की और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
योगी आदित्यनाथ की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब SIR और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों का विरोध तेज है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने 25 सितंबर को लखनऊ में प्रदर्शन कर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी।
SIR को लेकर विपक्ष के रवैये पर क्या बोले योगी?
मुख्यमंत्री ने कहा कि SIR को लेकर विपक्ष की ओर से जिस तरह सवाल उठाए जा रहे हैं, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके मुताबिक मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर सवाल उठाना जिम्मेदाराना रवैया नहीं है।
योगी ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों से चुनाव व्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर जनता से माफी मांगने की बात भी कही।
उन्होंने कहा कि भारत में चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित होती है और चुनावी प्रक्रिया को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा करना उचित नहीं है।
संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने का मुद्दा
प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह राजनीतिक हितों के लिए संवैधानिक संस्थाओं को लगातार सवालों के घेरे में लाता रहा है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष को लोकतांत्रिक संस्थाओं और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने के बजाय संस्थागत व्यवस्था पर भरोसा करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि चुनाव में हार के बाद EVM को लेकर सवाल उठाना भी उचित नहीं है।
ये मुख्यमंत्री के राजनीतिक आरोप और उनका मूल्यांकन हैं; विपक्षी दलों का SIR तथा निर्वाचन आयोग को लेकर अलग पक्ष है।
राहुल गांधी और बालाकोट का भी किया जिक्र
योगी आदित्यनाथ ने अपने बयान में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने पहले न्यायपालिका पर सवाल उठाए थे।
मुख्यमंत्री ने बालाकोट एयर स्ट्राइक का जिक्र करते हुए भी कांग्रेस पर सवाल उठाए और कहा कि उस कार्रवाई पर सवाल उठाना सेना के सम्मान से जुड़ा विषय था।
इन टिप्पणियों पर कांग्रेस की ओर से अलग-अलग मौकों पर जवाब दिए जाते रहे हैं। इसलिए इन्हें मुख्यमंत्री के राजनीतिक वक्तव्य के रूप में देखा जाना चाहिए।
SIR पर पहले से जारी है राजनीतिक विवाद
SIR को लेकर पिछले कुछ दिनों से निर्वाचन आयोग और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ा है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने 25 सितंबर को लखनऊ में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में भी लिया था।
समाजवादी पार्टी ने भी निर्वाचन आयोग को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 23 सितंबर को कहा था कि मौजूदा CEC के कार्यकाल में चुनाव नहीं कराए जाने चाहिए।
निर्वाचन आयोग ने अपने फैसलों पर क्या कहा?
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहे विवाद के बीच निर्वाचन आयोग ने अपने फैसलों को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। आयोग के अनुसार पिछले एक वर्ष में उसके सभी आदेश पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णय रहे हैं। वहीं, आयोग ने उत्तर प्रदेश में CEC के कुछ कार्यक्रमों की तारीख बदलने को सामान्य प्रशासनिक और लॉजिस्टिक प्रक्रिया बताया था तथा इसे SIR विवाद से जोड़ने से इनकार किया था।
लखनऊ से फिर तेज हुई सियासी बयानबाजी
SIR को लेकर लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ताजा बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में चल रही बहस का नया हिस्सा है। एक तरफ विपक्ष निर्वाचन आयोग और मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, जबकि मुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ पक्ष चुनाव प्रक्रिया तथा आयोग की भूमिका का बचाव कर रहे हैं।
ऐसे में SIR से जुड़े दावों और आरोपों को समझने के लिए संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान और निर्वाचन आयोग की ओर से जारी जानकारी को अलग-अलग देखना महत्वपूर्ण है। फिलहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और विरोध-प्रदर्शन जारी हैं।




