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लखनऊ में ‘एक कचौड़ी, दो समोसा’ पोस्टर से सियासी संदेश, BJP और चुनाव आयोग पर सपा का निशाना

Lucknow SP Poster: लखनऊ में सपा कार्यालय के बाहर ‘एक कचौड़ी, दो समोसा… जनता को BJP पर नहीं रहा भरोसा’ वाला होर्डिंग लगाया गया। सपा नेता मोहम्मद इखलाक ने रोजगार और चुनावी पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शनिवार को समाजवादी पार्टी कार्यालय के बाहर लगाए गए एक होर्डिंग ने राजनीतिक चर्चा तेज कर दी। ‘एक कचौड़ी, दो समोसा… जनता को BJP पर नहीं रहा भरोसा’ और ‘एक कचौड़ी, दो समोसा… चुनाव आयोग पर न करना भरोसा’ जैसे नारों वाले इस पोस्टर के जरिए सपा ने भाजपा और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाए।

यह होर्डिंग सपा नेता मोहम्मद इखलाक की ओर से लगाए जाने की जानकारी सामने आई है। पोस्टर में इस्तेमाल किया गया ‘एक कचौड़ी, दो समोसा’ वाला वाक्यांश हाल में सोशल मीडिया और राजनीतिक बयानों में चर्चा में रहा है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी इसी तुकबंदी वाले नारे का इस्तेमाल कर चुके हैं।

रोजगार और युवाओं के भरोसे का मुद्दा उठाया
मोहम्मद इखलाक ने कहा कि मुद्दा केवल कचौड़ी और समोसे का नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं और मतदाताओं के भरोसे से जुड़ा है।

उन्होंने रोजगार के मुद्दे पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन युवाओं से नौकरी और बेहतर भविष्य के वादे किए गए थे, उन्हें अब ई-रिक्शा और टैक्सी चलाने की सलाह दी जा रही है। उनका सवाल था कि पढ़ाई करने वाले युवाओं को रोजगार के बजाय दूसरे पेशे अपनाने की सलाह क्यों दी जाए।

यह बयान सपा के उस राजनीतिक विमर्श का हिस्सा है जिसमें पार्टी बेरोजगारी और युवाओं के रोजगार को आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले प्रमुख मुद्दों में शामिल कर रही है।

चुनाव आयोग को लेकर भी पोस्टर में सवाल

होर्डिंग में चुनाव आयोग को लेकर भी टिप्पणी की गई है। इखलाक ने कहा कि लोकतांत्रिक और चुनावी व्यवस्था में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी है।

उन्होंने चंडीगढ़ नगर निगम मेयर चुनाव 2024 का उदाहरण दिया। सुप्रीम कोर्ट ने उस मामले में पाया था कि मेयर पद के उम्मीदवार कुलदीप कुमार के पक्ष में पड़े आठ मतों को गलत तरीके से अमान्य माना गया था। अदालत ने चुनाव परिणाम रद्द करते हुए कुलदीप कुमार को वैध रूप से निर्वाचित मेयर घोषित किया था।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े निष्कर्षों को सपा नेता ने चुनावी पारदर्शिता के अपने तर्क के संदर्भ में उठाया।

चुनाव आयोग के आंतरिक मतभेदों पर भी सियासत

इखलाक ने चुनाव आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया से जुड़ी हालिया खबरों का भी उल्लेख किया। सितंबर 2026 में सामने आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में कई फैसलों को लेकर आपत्तियां दर्ज की थीं।

हालांकि, भारत निर्वाचन आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद स्पष्ट किया था कि आंतरिक टिप्पणियां और अलग-अलग विचार निर्णय लेने की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं तथा पिछले वर्ष के अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

इसलिए पोस्टर में लगाए गए राजनीतिक आरोपों को सपा नेता के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए; इन्हें चुनाव आयोग के खिलाफ स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

‘वोट चोरी’ के आरोप को फिर उठाया

सपा नेता ने दावा किया कि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव लंबे समय से चुनावी प्रक्रिया और कथित ‘वोट चोरी’ को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी ने चुनाव आयोग के समक्ष शिकायतें और दस्तावेज भी प्रस्तुत किए थे।

इखलाक ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि चुनावी प्रक्रिया में अनियमितता नहीं होती तो भाजपा सत्ता में नहीं आती। यह उनका राजनीतिक आरोप है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की जा रही है।

हाल के दिनों में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के संशोधन को लेकर राजनीतिक बहस जरूर तेज हुई है। आयोग ने मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया पर उठे सवालों के बीच कुछ प्रशासनिक और तकनीकी कदमों की घोषणा भी की है।

‘एक कचौड़ी, दो समोसा’ नारा क्यों चर्चा में है?

‘एक कचौड़ी, दो समोसा’ वाला तुकबंदी आधारित नारा हाल में सोशल मीडिया और सार्वजनिक प्रदर्शनों में वायरल हुआ है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसे बाद में राजनीतिक संदेशों में भी इस्तेमाल किया जाने लगा।

लखनऊ में सपा कार्यालय के बाहर लगाए गए पोस्टर ने इसी लोकप्रिय वाक्यांश को भाजपा और चुनाव आयोग से जुड़े राजनीतिक संदेश के साथ जोड़ दिया है। इससे पोस्टर सोशल मीडिया और स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में ध्यान आकर्षित कर रहा है।

आगामी चुनाव से पहले पोस्टर पॉलिटिक्स

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच लखनऊ में राजनीतिक पोस्टरबाजी का दौर जारी है। सपा कार्यालय के बाहर लगा यह नया होर्डिंग रोजगार, युवाओं के भरोसे और चुनावी पारदर्शिता जैसे मुद्दों को एक साथ उठाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।

हालांकि, पोस्टर में लिखे आरोप और सपा नेता के बयान राजनीतिक दावे हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली को लेकर सामने आई रिपोर्टों पर कहा है कि आयोग के अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं।

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