नवरात्रि में सीएम योगी का अलग अंदाज, संत और प्रशासक दोनों भूमिकाओं में नजर आए
Yogi Adityanath Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि में सीएम योगी ने मंदिरों में पूजन, जनता दर्शन और कन्या पूजन के जरिए आध्यात्मिक और प्रशासनिक भूमिका निभाई। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
लखनऊ। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक बार फिर बहुआयामी भूमिका में नजर आए। इस दौरान उन्होंने एक ओर संत और सनातन परंपरा के ध्वजवाहक के रूप में धार्मिक अनुष्ठान किए, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के मुखिया के रूप में जनसेवा और विकास कार्यों को प्राथमिकता दी।
अयोध्या से देवीपाटन तक पूजन-अर्चन
नवरात्रि की प्रथमा तिथि पर मुख्यमंत्री अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल हुए। यहां उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के साथ पूजन-अर्चन किया।
सप्तमी तिथि पर वे मां पाटेश्वरी मंदिर (देवीपाटन) पहुंचे, जबकि अष्टमी को गोरखनाथ मंदिर में हवन-पूजन किया। नवमी के दिन उन्होंने कन्या पूजन कर परंपरा का निर्वहन किया।
राम, कृष्ण और शिव की धरा पर नमन
मार्च माह में मुख्यमंत्री ने तीन प्रमुख धार्मिक स्थलों का भी दौरा किया—
- काशी विश्वनाथ मंदिर (वाराणसी)
- श्रीकृष्ण जन्मभूमि (मथुरा)
- हनुमानगढ़ी मंदिर (अयोध्या)
इन स्थलों पर पहुंचकर उन्होंने प्रदेश की समृद्धि और सुख-शांति की कामना की।
जनता दर्शन और विकास कार्यों पर फोकस
आध्यात्मिक गतिविधियों के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने जनसेवा को भी प्राथमिकता दी।
- गोरखपुर और लखनऊ में कई बार जनता दर्शन आयोजित कर लोगों की समस्याएं सुनीं
- महिला दिवस पर महिला सशक्तीकरण योजनाओं के तहत करोड़ों रुपये डीबीटी के माध्यम से वितरित किए
- 1228 नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए
- खिलाड़ियों को पुरस्कार व नौकरी के अवसर दिए
- बहराइच में गरीब परिवारों को आवास और भूमि पट्टे वितरित किए
कन्या पूजन और ‘नर सेवा’ का संदेश
नवरात्रि के दौरान मुख्यमंत्री ने कन्या पूजन कर समाज को ‘नारी सम्मान’ का संदेश दिया। इसके साथ ही उन्होंने “नर सेवा ही नारायण सेवा” के सिद्धांत को आगे बढ़ाते हुए जनकल्याण योजनाओं को जमीन पर उतारने पर जोर दिया।
युवाओं और समाज को संदेश
राजस्थान और अन्य कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री ने युवाओं को असफलता से सीख लेकर आगे बढ़ने की सलाह दी। साथ ही अभिभावकों से बच्चों को मोबाइल से दूर रखने और पारिवारिक संवाद बढ़ाने का आह्वान किया।
चैत्र नवरात्रि के दौरान योगी आदित्यनाथ का यह दौर आध्यात्म और प्रशासन के संतुलन का उदाहरण रहा। मंदिरों में पूजा-अर्चना से लेकर जनता के बीच पहुंचकर समस्याओं का समाधान करने तक, उन्होंने एक संत और जननेता—दोनों भूमिकाओं को समान रूप से निभाने का संदेश दिया।



