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सपा का बड़ा दांव: रुक्मिणी देवी निषाद बनीं महिला सभा की प्रदेश अध्यक्ष, निषाद वोट बैंक पर फोकस

“2027 चुनाव से पहले रुक्मिणी देवी निषाद बनीं महिला सभा की प्रदेश अध्यक्ष; पिछड़ा, दलित और महिला समीकरण मजबूत करने की रणनीति”

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी (सपा) ने बड़ा रणनीतिक कदम उठाते हुए रुक्मिणी देवी निषाद को महिला सभा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। वह चर्चित पूर्व सांसद फूलन देवी की बड़ी बहन हैं। इस फैसले को 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक समीकरण साधने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

सपा नेतृत्व, खासतौर पर अखिलेश यादव की रणनीति के तहत यह नियुक्ति सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण को मजबूत करने का संकेत है। निषाद समुदाय, जिसमें केवट, मल्लाह, बिंद, कश्यप, नोनिया और मांझी जैसी उपजातियां शामिल हैं, पूर्वांचल और अवध की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है।

67 वर्षीय रुक्मिणी देवी मूल रूप से जालौन जिले के शेखपुर गुड्डा पुरवा गांव की रहने वाली हैं और लंबे समय से बुंदेलखंड क्षेत्र में सक्रिय रही हैं। उनकी जमीनी पकड़ और सामाजिक पहचान को देखते हुए पार्टी ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है। वह पहले भी चुनावी राजनीति में सक्रिय रही हैं और फतेहपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुकी हैं।

इस नियुक्ति के जरिए सपा ने महिला वोट बैंक पर भी फोकस बढ़ाया है। हाल ही में पार्टी द्वारा महिलाओं के लिए योजनाओं की घोषणा के बाद अब संगठन में भी पिछड़े वर्ग की महिला को प्रमुख पद देकर संदेश देने की कोशिश की गई है कि पार्टी महिलाओं को नेतृत्व में आगे ला रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में निषाद समुदाय का वोट प्रतिशत भले 4-5 फीसदी माना जाता हो, लेकिन उपजातियों को मिलाकर इसका प्रभाव करीब 8-9 फीसदी तक पहुंचता है। लगभग 150 से अधिक विधानसभा सीटों पर इस समुदाय की भूमिका निर्णायक मानी जाती है।

ऐसे में फूलन देवी के नाम से जुड़ी भावनात्मक और प्रतीकात्मक पहचान को सामने लाकर सपा ने एक साथ सामाजिक, राजनीतिक और भावनात्मक समीकरण साधने की कोशिश की है।

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