69 हजार शिक्षक भर्ती विवाद फिर गरमाया, अभ्यर्थियों ने विसंगतियां दूर करने की उठाई मांग
“लखनऊ में 69 हजार शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक को ज्ञापन सौंपा। शिक्षित बेरोजगार शिक्षक अभ्यर्थी कल्याण समिति ने भर्ती विसंगतियां दूर कर सभी याचियों को ‘याची लाभ’ देने की मांग की। मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।”
लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में हुई 69 हजार शिक्षक भर्ती में न्याय की मांग को लेकर शिक्षित बेरोजगार शिक्षक अभ्यर्थी कल्याण समिति के नेतृत्व में अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री Brajesh Pathak को ज्ञापन सौंपा। अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में कथित विसंगतियों को दूर करते हुए सभी याचियों को ‘याची लाभ’ देने की मांग उठाई।
प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि वर्ष 2018 में निकाली गई 69 हजार शिक्षक भर्ती में बीएड अभ्यर्थियों को अंतिम अवसर के रूप में मौका दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद कई योग्य अभ्यर्थी चयन से वंचित रह गए। अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में हुई तकनीकी व प्रशासनिक त्रुटियों के कारण पात्र उम्मीदवारों को नियुक्ति नहीं मिल सकी।
अभ्यर्थियों के अनुसार पूर्व की 68,500 शिक्षक भर्ती में बची सीटों को 69 हजार भर्ती में समायोजित किया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इससे सभी वर्गों के उम्मीदवारों को नुकसान हुआ। उनका कहना है कि बीएड और बीटीसी के बीच अकादमिक भिन्नता के बावजूद कई बीएड अभ्यर्थियों ने पात्रता परीक्षा में अधिक अंक प्राप्त किए, फिर भी उन्हें चयन सूची में स्थान नहीं मिला।
समिति ने मांग की कि भर्ती में हुई विसंगतियों को दूर कर सभी याचियों को न्याय दिया जाए और उन्हें ‘याची लाभ’ प्रदान किया जाए।
अभ्यर्थियों ने बताया कि यह मामला फिलहाल Supreme Court of India में विचाराधीन है और उन्हें न्यायालय से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद है।
इस दौरान समिति के अध्यक्ष विवेक द्विवेदी, उपाध्यक्ष शिखा पाल और महासचिव अरविंद सिकरवार सहित कई अभ्यर्थी मौजूद रहे।


