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मौनी अमावस्या विवाद: पालकी रोके जाने से नाराज शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज माघ मेला में मौनी अमावस्या पर संगम स्नान से रोके जाने के विरोध में अन्न-जल त्याग दिया है और धरने पर बैठ गए हैं। आगे की रणनीति आज साझा करेंगे।

प्रयागराज। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रयागराज माघ मेला के दौरान मौनी अमावस्या महास्नान पर्व पर संगम स्नान से रोके जाने के विरोध में अन्न-जल त्याग दिया है और धरने पर बैठ गए हैं। इस घटनाक्रम से धार्मिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है।

प्रयागराज से सामने आई जानकारी के अनुसार, रविवार को मौनी अमावस्या के अवसर पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पालकी में सवार होकर संगम स्नान के लिए जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस-प्रशासन ने उनकी पालकी को रोक दिया, जिससे विवाद खड़ा हो गया।

घटना के बाद से शंकराचार्य का आक्रोश लगातार बढ़ता गया। दावा किया जा रहा है कि उसी दिन से उन्होंने मौन व्रत धारण करते हुए अन्न-जल का त्याग कर दिया। अब वह माघ मेला क्षेत्र में धरने पर बैठे हैं और सोमवार दोपहर करीब 12 बजे अपनी आगे की रणनीति का ऐलान कर सकते हैं।

पालकी रोके जाने पर हंगामा

मौनी अमावस्या पर पालकी रोकने की घटना के बाद शंकराचार्य के समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। हालात इस कदर बिगड़ गए कि संगम तट पर करीब तीन घंटे तक धक्कामुक्की, खींचतान और हो-हल्ला चलता रहा। इस दौरान पुलिस के आला अधिकारियों के साथ भी समर्थकों की नोकझोंक हुई।

काफी देर तक चले हंगामे के बावजूद जब प्रशासन नहीं माना तो अंततः शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बिना संगम स्नान किए ही वापस लौट गए। इसके बाद मामला और गंभीर हो गया और धरने की स्थिति बन गई।

फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर पुलिस-प्रशासन की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है, जबकि धार्मिक संगठनों में इस मुद्दे को लेकर नाराजगी बढ़ती नजर आ रही है।

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