उत्तर प्रदेश विधानसभा बजट सत्र 2026:टेट अनिवार्य, धर्म की स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था पर गरमाया सदन
“UP Vidhan Sabha Budget Session 2026 में टेट अनिवार्यता, धर्म की स्वतंत्रता, वक्फ बोर्ड, पंचायत चुनाव और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर जोरदार बहस हुई। लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश विधानसभा में सरकार और विपक्ष आमने-सामने रहे। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।”
लखनऊ। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर चर्चा के दूसरे दिन उत्तर प्रदेश विधानसभा में शिक्षा, कानून-व्यवस्था, वक्फ संपत्तियां, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव और धार्मिक शोभायात्राओं जैसे मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना की अध्यक्षता में कार्यवाही शुरू हुई और विभिन्न दलों के विधायकों ने अपने-अपने क्षेत्रीय और जनहित के मुद्दे उठाए।
टेट अनिवार्यता और स्कूल बंदी का मुद्दा
सपा विधायकों ने परिषदीय विद्यालयों की स्थिति और शिक्षकों की भर्तियों का मुद्दा उठाया। आरोप लगाया गया कि गांवों में स्कूल बंद किए जा रहे हैं जबकि अन्य गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
टेट (Teacher Eligibility Test) को सभी शिक्षकों के लिए अनिवार्य बनाए जाने पर भी सरकार से स्पष्ट रुख मांगा गया।
शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार ने किसी भी परिषदीय विद्यालय को बंद नहीं किया है। शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया नियमों के अनुसार की जा रही है और टेट से संबंधित प्रावधान राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं।
शिक्षकों की ड्यूटी और फीस रेगुलेशन एक्ट
विपक्ष ने आरोप लगाया कि परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जा रहा है, जिससे पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। निजी स्कूलों में फीस, किताब और ड्रेस के नाम पर मनमानी वसूली का मुद्दा भी उठा।
इस पर मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि प्रदेश में फीस रेगुलेशन एक्ट लागू है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर शिकायतों की जांच की जाती है और दोषी निजी स्कूलों पर कार्रवाई की जाती है।
धर्म की स्वतंत्रता और शोभायात्राओं पर रोक
सपा विधायक सचिन यादव ने बाबा साहेब और महात्मा बुद्ध की शोभायात्राओं पर रोक लगाने का मुद्दा उठाते हुए इसे धर्म की स्वतंत्रता से जोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन अनुमति देने में भेदभाव करता है।
संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने स्पष्ट किया कि योगी सरकार 2.0 में धरना-प्रदर्शन और जुलूसों के लिए स्पष्ट शासनादेश जारी किया गया है। धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों के लिए एक समान नियम लागू हैं और अनुमति प्रक्रिया पारदर्शी है।
वक्फ बोर्ड और खाली पदों पर सवाल
सपा विधायक कमाल अख्तर ने वक्फ बोर्ड में 70 प्रतिशत मुतवल्ली पद खाली होने का मुद्दा उठाया और पूछा कि ऐसे में संपत्तियों का पंजीकरण कैसे होगा।
सरकार की ओर से कहा गया कि केंद्र की नियमावली के अनुसार प्रक्रिया जारी है और रिक्त पदों को भरने की कार्रवाई चरणबद्ध ढंग से की जा रही है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव और डायरेक्ट चुनाव की मांग
सपा विधायक अतुल प्रधान ने गांवों की बदहाल स्थिति और प्रधानों के साथ अधिकारियों के व्यवहार पर सवाल उठाए। उन्होंने जिला पंचायत और ब्लॉक प्रमुख के चुनाव सीधे जनता से कराने की मांग की।
पंचायतीराज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने बताया कि इस संबंध में केंद्र सरकार को दो बार पत्र भेजा गया है। वर्तमान में नियमावली के अनुसार ही प्रक्रिया संचालित हो रही है।
कानून-व्यवस्था पर बहस
सपा विधायक संग्राम यादव ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट की टिप्पणियों का हवाला दिया और पुलिस कार्रवाई पर चिंता जताई। सरकार ने जवाब में कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था पहले से बेहतर हुई है और अपराध नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं।
उच्च शिक्षा में सुविधाओं का अंतर
विधायक पल्लवी पटेल ने विश्वविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की मेडिकल लीव और सुविधाओं का मुद्दा उठाया।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालय के शिक्षकों की सेवा शर्तें अलग-अलग नियमों के तहत निर्धारित होती हैं, इसलिए सुविधाओं में अंतर स्वाभाविक है।
बजट सत्र के दूसरे दिन शिक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता, पंचायत चुनाव और कानून-व्यवस्था जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने रहे। सत्ता पक्ष ने जहां अपनी नीतियों का बचाव किया, वहीं विपक्ष ने जनहित और पारदर्शिता के सवाल उठाकर सरकार को घेरने की कोशिश की।
आने वाले दिनों में बजट पर विस्तृत चर्चा और विभागवार जवाबों के साथ सदन में और तीखी बहस की संभावना है।



