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*ब्राह्मण विधायकों की बैठक से भाजपा में मची खलबली*

प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी नाराज, दी सख्त चेतावनी — “दोबारा हुआ तो अनुशासनहीनता”

“ब्राह्मण विधायकों की बैठक से भाजपा में अंदरूनी खलबली मच गई है। लखनऊ में हुई बैठक पर प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी नाराज, दोबारा ऐसी गतिविधि पर अनुशासनहीनता की चेतावनी दी।”

हाइलाइट्स :

  • लखनऊ में करीब 50 ब्राह्मण विधायकों की बैठक से सियासी हलचल

  • प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने जताई नाराजगी

  • जातीय आधार पर बैठक को बताया पार्टी परंपराओं के खिलाफ

  • विपक्ष ने भाजपा पर साधा निशाना

  • जनवरी में फिर बैठक की चर्चा से बढ़ी चिंता

मनोज शुक्ला

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरणों को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। भाजपा के करीब 50 ब्राह्मण विधायकों की लखनऊ में हुई बैठक ने पार्टी के भीतर खलबली मचा दी है। नव निर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी इस बैठक से खासे नाराज नजर आए और उन्होंने बैठक में शामिल विधायकों को साफ शब्दों में चेतावनी दे दी है कि भविष्य में इस तरह की कोई भी गतिविधि अनुशासनहीनता मानी जाएगी।

23 दिसंबर की बैठक बनी विवाद की जड़

23 दिसंबर को विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान कुशीनगर से भाजपा विधायक पीएन पाठक के लखनऊ स्थित आवास पर एक बैठक हुई। इसे उनकी पत्नी के जन्मदिन के अवसर पर “सहभोज” बताया गया, लेकिन इस आयोजन में पूर्वांचल और बुंदेलखंड के 45 से 50 ब्राह्मण विधायक शामिल हुए। बैठक में लिट्टी-चोखा और फलाहार परोसे गए। खास बात यह रही कि इसमें अन्य दलों के कुछ ब्राह्मण विधायक भी मौजूद थे।

बैठक की खबर सामने आते ही पार्टी नेतृत्व में हलचल मच गई। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री कार्यालय से भी इस मामले में जानकारी ली गई। आरएसएस और भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी भी स्थिति को संभालने में जुटे।

पंकज चौधरी की दो टूक

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने बिना किसी विधायक का नाम लिए सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा—
“भाजपा सिद्धांतों और आदर्शों की पार्टी है। परिवार, वर्ग या जाति विशेष के नाम पर राजनीति भाजपा की परंपराओं के अनुकूल नहीं है। इस तरह की गतिविधियों से समाज में गलत संदेश जाता है।”

उन्होंने साफ चेतावनी दी कि भविष्य में यदि किसी जनप्रतिनिधि ने ऐसी गतिविधि दोहराई तो उसे अनुशासनहीनता माना जाएगा। साथ ही विधायकों को नेगेटिव नैरेटिव से बचने और अलर्ट रहने की सलाह दी गई है।

विपक्ष को मिला मुद्दा

इस बैठक के बाद विपक्ष को भी भाजपा पर हमला बोलने का मौका मिल गया।

सपा नेता शिवपाल यादव ने बयान दिया—
“भाजपा जाति में बांटती है। भाजपा से नाराज ब्राह्मण विधायक सपा में आ जाएं, पूरा सम्मान मिलेगा।”

बैठक में क्या-क्या मुद्दे उठे?

सूत्रों के अनुसार, बैठक में कई अहम बिंदुओं पर चर्चा हुई—

1- संगठन और सरकार में ब्राह्मणों की अनदेखी विधायकों का कहना था कि आरएसएस, भाजपा और सरकार में ब्राह्मण समाज की प्रभावी सुनवाई नहीं हो रही। संगठन में बड़े पदों पर ब्राह्मण प्रतिनिधित्व कम हुआ है।

2- डिप्टी सीएम को पर्याप्त ताकत नहीं

ब्राह्मण समाज से आने वाले डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को पर्याप्त अधिकार न मिलने की बात भी उठी।

3- प्रदेश अध्यक्ष चुनाव का मुद्दा

ब्राह्मण नेता सुनील भराला द्वारा प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए नामांकन की कोशिश और अंतिम समय में उसे वापस लेने की मजबूरी को भी समाज की उपेक्षा से जोड़ा गया।

4- इटावा कांड के बाद बढ़ा असंतोष

इटावा कथावाचक विवाद के बाद ब्राह्मण समाज में नाराजगी और तेज हुई। सोशल मीडिया पर भी सरकार के खिलाफ अभियान चला।

जनवरी में फिर बैठक के संकेत

सूत्रों का दावा है कि ब्राह्मण विधायकों की एक और बैठक जनवरी में प्रस्तावित है, जिसमें समाज के राजनीतिक और सामाजिक भविष्य को लेकर रणनीति तय की जा सकती है।

यूपी विधानसभा में इस समय 52 ब्राह्मण विधायक हैं, जिनमें से 46 भाजपा से हैं। ऐसे में ब्राह्मण विधायकों की यह गोलबंदी भाजपा और योगी सरकार के लिए एक नई चुनौती के रूप में देखी जा रही है।

एक ओर भाजपा नेतृत्व जाति आधारित राजनीति से दूरी का संदेश दे रहा है, वहीं दूसरी ओर अंदरखाने उभरता असंतोष आने वाले चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

फिलहाल सवाल यही है—
क्या भाजपा इस असंतोष को साध पाएगी, या ब्राह्मण विधायकों की यह नाराजगी 2027 की राजनीति में बड़ा असर डालेगी?

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