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लोकसभा से 8 विपक्षी सांसदों का निलंबन खत्म, स्पीकर ओम बिरला की सख्त चेतावनी

“लोकसभा से 8 विपक्षी सांसदों का निलंबन हटाया गया। स्पीकर ओम बिरला ने सदस्यों को पोस्टर और AI से बनी तस्वीरें न दिखाने की चेतावनी दी। जानें पूरा मामला।”

नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को बजट सत्र के दौरान बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। सदन ने पहले चरण में निलंबित किए गए 8 विपक्षी सांसदों का सस्पेंशन वापस ले लिया। इनमें 7 सांसद कांग्रेस के और एक सांसद वाम दल का शामिल है।

ये सभी सांसद 4 फरवरी को पूरे बजट सत्र के लिए निलंबित किए गए थे। निलंबन हटाने का प्रस्ताव कांग्रेस सांसद के. सुरेश समेत तीन सांसदों द्वारा रखा गया, जिसे सदन ने ध्वनि मत से पारित कर दिया।

क्या था पूरा विवाद

निलंबित सांसदों पर आरोप था कि उन्होंने सदन में हंगामा करते हुए पीठासीन अधिकारी कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी की कुर्सी की ओर कागज फेंके और कार्यवाही में बाधा डाली।

यह घटना उस समय हुई थी जब राहुल गांधी सदन में वर्ष 2020 के भारत-चीन सीमा तनाव, विशेषकर पूर्वी लद्दाख की स्थिति, का मुद्दा उठा रहे थे। विपक्ष इस विषय पर सरकार से जवाब मांग रहा था, जिसके चलते सदन में तीखी नोकझोंक और हंगामा हुआ।

समर्थन और सियासी बयानबाजी

निलंबन हटाने के प्रस्ताव का समर्थन समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने किया।

उन्होंने कहा कि संसद की मर्यादा बनाए रखना केवल विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने खास तौर पर सत्तापक्ष के कुछ सांसदों के व्यवहार पर भी सवाल उठाए और संयम बरतने की नसीहत दी।

सदन में हंगामा और स्पीकर की सख्ती

प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच फिर से तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला। इस दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए ओम बिरला ने हस्तक्षेप किया।

स्पीकर ने सभी सदस्यों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा—

  • सदन में पोस्टर या प्लेकार्ड का प्रदर्शन न करें

  • एआई (AI) से तैयार की गई तस्वीरों का उपयोग भी न किया जाए

  • संसदीय गरिमा और नियमों का पालन अनिवार्य है

उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और यहां अनुशासन बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

राजनीतिक मायने

निलंबन समाप्त होने से विपक्षी दलों को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि बजट सत्र के दौरान उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी। वहीं, स्पीकर की सख्त टिप्पणी से यह संकेत मिला है कि आगे सदन में किसी भी तरह की अनुशासनहीनता पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर संसद में बढ़ते टकराव और राजनीतिक तनाव को उजागर कर दिया है, जहां मुद्दों पर बहस के साथ-साथ शालीनता बनाए रखना भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

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