बरेली में PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री का धरना, डीएम को खुली चुनौती
PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री विवाद में नया मोड़। बरेली डीएम कार्यालय के बाहर धरना, निलंबन को बताया सुनियोजित साजिश। प्रशासन ने आरोपों को किया खारिज। पूरी खबर पढ़ें।
बरेली। PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री विवाद लगातार गहराता जा रहा है।
बरेली में यूजीसी विवाद को लेकर सार्वजनिक रूप से इस्तीफा देने वाले पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री मंगलवार को जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने अपने निलंबन को एक सुनियोजित साजिश बताते हुए डीएम बरेली को खुली चुनौती दी।
धरने के दौरान अलंकार अग्निहोत्री ने मांग की कि जिलाधिकारी स्वयं सामने आकर यह स्पष्ट करें कि सोमवार शाम किस व्यक्ति का फोन आया था, जिसमें पंडित समाज के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा कि यदि जिलाधिकारी नहीं आते हैं, तो प्रधानमंत्री या गृह मंत्री को इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
गणतंत्र दिवस से शुरू हुआ विवाद
गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस 2026 के दिन नगर मजिस्ट्रेट पद पर तैनात अलंकार अग्निहोत्री ने अपने कार्यालय में अपने नाम के आगे ‘RESIGNED’ लिखकर और भाजपा विरोधी नारे वाला पोस्टर लगाकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद डीएम अविनाश सिंह ने उन्हें बातचीत के लिए बुलाया।
45 मिनट बंधक बनाए जाने का आरोप
अलंकार अग्निहोत्री का आरोप है कि डीएम कार्यालय में उन्हें करीब 45 मिनट तक बंधक बनाकर रखा गया। देर रात उन्होंने सरकारी आवास छोड़ने का भी निर्णय लिया और अपनी सुरक्षा को लेकर खतरे की आशंका जताई।
प्रशासन का पक्ष
हालांकि प्रशासन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
एडीएम न्यायिक देश दीपक सिंह ने कहा कि बंधक बनाए जाने जैसी कोई स्थिति नहीं थी। अलंकार स्वयं मिलने आए थे और बैठक में एडीएम सिटी एवं एडीएम प्रशासन मौजूद थे। बातचीत के बाद वे स्वयं चले गए।
निलंबन और जांच आदेश
शासन की ओर से जारी आदेश में उत्तर प्रदेश सरकारी सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के तहत अलंकार अग्निहोत्री को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया गया है।
निलंबन अवधि में उन्हें शामली डीएम कार्यालय से संबद्ध किया गया है। पूरे मामले की जांच मंडलायुक्त बरेली भूपेंद्र एस चौधरी को सौंपी गई है।




