महाराष्ट्र राजनीति: अजित पवार के बाद बारामती की कमान किसके हाथ?
“Ajit Pawar के निधन के बाद बारामती विधानसभा सीट खाली। पार्टी में मंथन तेज, सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार उत्तराधिकारी की रेस में सबसे आगे। उपचुनाव जल्द।”
महाराष्ट्र की राजनीति में एक युग के अंत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अजित ‘दादा’ पवार की राजनीतिक विरासत कौन संभालेगा? विमान दुर्घटना में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असामयिक निधन से बारामती विधानसभा सीट रिक्त हो गई है, और इसके साथ ही पार्टी के भीतर मंथन तेज हो गया है।
ओमप्रकाश तिवारी, मुंबई।
क्षमता, कार्यशैली और आक्रामक राजनीतिक तेवर—इन सभी मामलों में अजित पवार का मुकाबला न उनके परिवार में था और न ही पार्टी में। अब उनके जाने के बाद बारामती की खाली हुई सीट को लेकर सबसे अहम प्रश्न यही है कि दादा की विरासत आगे कौन बढ़ाएगा।
बारामती सीट पर उपचुनाव तय
अजित पवार के निधन के बाद चूंकि विधानसभा का कार्यकाल अभी करीब चार वर्ष शेष है, इसलिए बारामती विधानसभा क्षेत्र में जल्द उपचुनाव होना तय माना जा रहा है। राजनीतिक हलकों में यह लगभग तय है कि इस सीट से पवार परिवार का ही कोई सदस्य उम्मीदवार होगा और उसकी जीत भी लगभग सुनिश्चित मानी जा रही है।
सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार सबसे आगे
संभावित दावेदारों में दो नाम सबसे प्रमुख हैं—
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सुनेत्रा पवार (पत्नी, वर्तमान राज्यसभा सांसद)
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पार्थ पवार (ज्येष्ठ पुत्र)
अजित पवार के समर्थकों का एक वर्ग सुनेत्रा पवार को बारामती से मैदान में उतारने के पक्ष में है, जबकि दूसरा वर्ग पार्थ पवार को अगली पीढ़ी का चेहरा मानकर आगे बढ़ाने की बात कर रहा है।
चाचा-भतीजे की जंग का रहा है इतिहास
पिछले तीन वर्षों में पवार परिवार ने जबरदस्त राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखे। जुलाई 2023 में शरद पवार से नाराज होकर अजित पवार ने पार्टी तोड़ दी और दो-तिहाई से अधिक विधायकों को अपने साथ ले गए।
लोकसभा चुनाव में अजित पवार ने बारामती से अपनी पत्नी सुनेत्रा पवार को चचेरी बहन सुप्रिया सुले के खिलाफ उतारा, लेकिन मतदाताओं ने शरद पवार के पाले को चुना और सुप्रिया सुले भारी मतों से जीत गईं।
इसके बाद अजित पवार ने सुनेत्रा पवार को राज्यसभा भेजकर दिल्ली की राजनीति में सक्रिय कर दिया।
पार्थ पवार के लिए बड़ा मौका?
पार्थ पवार ने 2019 में मावल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन हार के बाद वे सक्रिय चुनावी राजनीति से दूर रहे। अब बारामती उपचुनाव उनके लिए राजनीतिक वापसी का सुनहरा अवसर बन सकता है।
सूत्रों के अनुसार, बदले हुए पारिवारिक समीकरणों में इस बार शरद पवार और सुप्रिया सुले का समर्थन भी पार्थ पवार को मिल सकता है।
उपमुख्यमंत्री पद पर सस्पेंस
जहां तक अजित पवार के निधन से खाली हुए उपमुख्यमंत्री पद का सवाल है, तो उस पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। पार्टी और सरकार दोनों स्तरों पर इस मुद्दे पर फिलहाल कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिले हैं।




