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कैश डोनेशन मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, सरकार और चुनाव आयोग से जवाब तलब

“कैश डोनेशन पर IT छूट को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों को नोटिस जारी किया। याचिका में कहा गया है कि डिजिटल पेमेंट के दौर में कैश डोनेशन पारदर्शिता खत्म करता है, इसलिए इस पर रोक लगनी चाहिए।”

नई दिल्ली। कैश डोनेशन कानून को चुनौती देने वाली एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और सभी प्रमुख राजनीतिक दलों को नोटिस जारी किया है। याचिका में मांग की गई है कि राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाले ₹2,000 तक के कैश डोनेशन पर मिलने वाली आयकर छूट को तुरंत समाप्त किया जाए।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि देश में जहां डिजिटल पेमेंट सिस्टम सुरक्षित और व्यापक रूप से अपनाया जा रहा है, वहाँ कैश डोनेशन का चलन पारदर्शिता को खत्म करता है। नकद चंदे में यह पता लगाना संभव नहीं होता कि दान देने वाला कौन है, उसके स्रोत क्या हैं और उसकी मंशा क्या है। इससे राजनीतिक फंडिंग में काला धन व अपारदर्शी फंडिंग की आशंका बढ़ जाती है।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए केंद्र, चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों से विस्तृत जवाब माँगा है। याचिका में यह भी सुझाव दिया गया है कि जो राजनीतिक दल नकद दान स्वीकार करते हैं, उन्हें निर्वाचन चिह्न (Election Symbol) तथा पार्टी रजिस्ट्रेशन का दर्जा नहीं दिया जाना चाहिए।

वर्तमान नियमों के अनुसार ₹2,000 तक के कैश डोनेशन पर राजनीतिक दलों को आयकर छूट मिलती है, जबकि बड़े दान केवल चेक, बैंक ट्रांसफर या डिजिटल मोड से लिए जा सकते हैं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि छोटे दान की आड़ में अवैध फंडिंग आसानी से कैश के रूप में पार्टी अकाउंट में लाई जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट जल्द ही इस मामले की अगली सुनवाई करेगा, जिसके बाद राजनीतिक चंदे की व्यवस्था में बड़े बदलाव संभव माने जा रहे हैं।

विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल

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