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स्थायी डीजीपी की नियुक्ति टली, यूपीएससी ने प्रस्ताव लौटाया

3 महीने में नई गाइडलाइन के अनुसार दोबारा भेजना होगा प्रस्ताव, राजीव कृष्ण का नाम चर्चा में

“उत्तर प्रदेश में DGP नियुक्ति प्रक्रिया में बड़ा अपडेट, UPSC ने आपत्तियों के साथ प्रस्ताव लौटाया। अब नई गाइडलाइन के तहत 3 महीने में संशोधित पैनल भेजना होगा, राजीव कृष्ण की दावेदारी पर नजर।”

लखनऊ/उत्तर प्रदेश। UP DGP Appointment Newsउत्तर प्रदेश में स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति फिलहाल अटक गई है। UPSC ने राज्य सरकार द्वारा भेजा गया प्रस्ताव आपत्तियों के साथ वापस लौटा दिया है।

आयोग ने स्पष्ट किया है कि 2025 की नई गाइडलाइन और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार संशोधित प्रस्ताव तैयार कर दोबारा भेजा जाए। इसके लिए राज्य सरकार को 3 महीने का समय दिया गया है।

सूत्रों के मुताबिक, पहले भेजे गए प्रस्ताव में कार्यवाहक DGP राजीव कृष्ण का नाम सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सामने था। उन्हें 31 मई 2025 को कार्यवाहक DGP बनाया गया था, जब उन्होंने प्रशांत कुमार की जगह ली थी।

क्यों अटका मामला?

UPSC के नियमों के अनुसार—

  • DGP चयन के लिए वरिष्ठतम और बेदाग सेवा रिकॉर्ड वाले अधिकारियों का पैनल तैयार होता है

  • इसमें से टॉप 3 अधिकारियों का चयन किया जाता है

  • राज्य सरकार उसी पैनल में से किसी एक को DGP नियुक्त करती है

बताया जा रहा है कि पहले भेजे गए प्रस्ताव में इन मानकों का पूरी तरह पालन नहीं हुआ, इसलिए इसे वापस कर दिया गया।

सीनियरिटी और विवाद

राजीव कृष्ण को कार्यवाहक DGP बनाते समय 11 वरिष्ठ IPS अधिकारियों को सुपरसीड किया गया था। उस समय उनकी सीनियरिटी सूची में स्थिति काफी नीचे (लगभग 12वें स्थान) बताई गई थी, जिसके चलते उन्हें स्थायी DGP नहीं बनाया जा सका।

वहीं, वरिष्ठ IPS अधिकारी रेणुका मिश्रा को DGP रेस से बाहर कर दिया गया है। उन्हें 2024 के पुलिस भर्ती पेपर लीक मामले में जिम्मेदार माना गया था।

अब उत्तर प्रदेश सरकार को—

  • नई गाइडलाइन के अनुसार फ्रेश पैनल तैयार करना होगा

  • योग्य अधिकारियों की सूची बनाकर UPSC को भेजना होगा

  • इसके बाद ही स्थायी DGP की नियुक्ति संभव होगी

इस घटनाक्रम से साफ है कि प्रदेश में शीर्ष पुलिस पद की नियुक्ति अब पूरी तरह नियमों और पारदर्शिता के आधार पर ही तय होगी।

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