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AIPOC सम्मेलन संपन्न: 2047 के विकसित भारत में विधायिकाओं की अहम भूमिका – ओम बिरला

“लखनऊ में 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन के समापन पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विधायिकाओं की भूमिका, National Legislative Index, बजट सत्र और संसदीय व्यवधान पर अहम बयान दिया।”

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान भवन, लखनऊ में आयोजित 86वां अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समापन भाषण के साथ संपन्न हो गया। तीन दिन तक चले इस राष्ट्रीय सम्मेलन में संसदीय लोकतंत्र को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी और जन-केंद्रित बनाने पर गहन मंथन हुआ।

समापन सत्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, राज्यसभा के उपसभापति, उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति और विधानसभा अध्यक्ष ने भी अपने विचार साझा किए।

विकसित भारत 2047 में विधायिकाओं की भूमिका अहम

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में विधायिकाओं की भूमिका निर्णायक होगी। इसके लिए संसदीय संस्थाओं को अधिक जनोपयोगी, प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाना आवश्यक है।

उन्होंने घोषणा की कि देशभर की विधानसभाओं और संसद के कार्यों के वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन के लिए ‘राष्ट्रीय विधायी सूचकांक’ (National Legislative Index) तैयार किया जाएगा। इसके लिए एक समिति के गठन की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।

साल में कम से कम 30 बैठकें जरूरी

ओम बिरला ने जोर देते हुए कहा कि राज्य विधान मंडलों में प्रति वर्ष न्यूनतम 30 बैठकें सुनिश्चित की जानी चाहिए
उन्होंने कहा—

“सदन जितना अधिक चलेगा, उतनी ही गंभीर, सार्थक और परिणाम देने वाली चर्चा संभव होगी।”


बजट सत्र से पहले विपक्ष और सत्ता पक्ष को संदेश

सम्मेलन के दौरान आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोकसभा अध्यक्ष ने आगामी बजट सत्र को लेकर स्पष्ट संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि नियोजित व्यवधान और लगातार गतिरोध लोकतंत्र के हित में नहीं हैं

ओम बिरला ने कहा—

“जब सदन बाधित होता है, तब सबसे अधिक नुकसान उस नागरिक को होता है, जिसकी समस्या पर चर्चा होनी थी।”

उन्होंने सभी दलों से सदन के सुचारू संचालन में सहयोग करने की अपील की।

Disruption नहीं, Discussion की संस्कृति चाहिए

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत के लोकतंत्र को Disruption नहीं, बल्कि Discussion और Dialogue की संस्कृति की आवश्यकता है।
उन्होंने दोहराया कि जनता के प्रति जवाबदेही केवल चुनाव तक सीमित नहीं, बल्कि हर दिन और हर सत्र में होनी चाहिए

पीठासीन अधिकारी लोकतंत्र के संरक्षक

ओम बिरला ने कहा कि पीठासीन अधिकारी केवल सदन चलाने वाले नहीं, बल्कि संविधान के प्रहरी और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के रक्षक होते हैं
उनकी निष्पक्षता और दृढ़ता ही संसद और विधानसभाओं की दिशा तय करती है।

सम्मेलन में पारित हुए 6 महत्वपूर्ण संकल्प

AIPOC सम्मेलन में कुल छह अहम संकल्प पारित किए गए, जिनमें—

  • विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में विधायिकाओं की सक्रिय भूमिका

  • सालाना 30 बैठकें सुनिश्चित करना

  • तकनीक आधारित पारदर्शी विधायी प्रक्रिया

  • सांसदों-विधायकों की क्षमता-वृद्धि

  • शोध और अनुसंधान सहायता को मजबूत करना

  • National Legislative Index का निर्माण

शामिल हैं।

अब तक का सबसे बड़ा AIPOC सम्मेलन

इस तीन दिवसीय सम्मेलन में 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 36 पीठासीन अधिकारियों ने भाग लिया। सहभागिता के लिहाज से यह अब तक का सबसे बड़ा AIPOC सम्मेलन रहा।

लोकसभा अध्यक्ष ने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश सरकार, विधानसभा-परिषद, लोकसभा-राज्यसभा सचिवालय और सभी प्रतिभागियों का आभार जताया।

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