यूपी में वोटर लिस्ट पर सियासी घमासान, रामगोपाल यादव ने लगाया वोट काटने का आरोप

यूपी में SIR को लेकर सियासी घमासान तेज। सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने हर विधानसभा में 10 हजार समर्थकों के वोट काटने की साजिश का आरोप लगाया। यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने शिकायत और सबूत मांगे।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि प्रदेश में मतदाता सूची में कथित हेरफेर कर समाजवादी पार्टी के समर्थकों के वोट काटने और भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों के नाम जोड़ने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से मामले का संज्ञान लेकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
रामगोपाल यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि कुछ उपजिलाधिकारी (SDM) अपने लॉगिन आईडी और पासवर्ड बीजेपी से जुड़े लोगों को सौंप रहे हैं। उनके मुताबिक, कथित तौर पर ये लोग बूथ लेवल रिवीजन कोऑर्डिनेटर (VRC) के साथ मिलकर मतदाता सूची में बदलाव कर रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
हर विधानसभा में 10 हजार वोट काटने का दावा
सपा महासचिव ने आरोप लगाया कि कथित साजिश के तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में करीब 10 हजार सपा समर्थकों के वोट काटने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने निर्वाचन आयोग से इस मामले में हस्तक्षेप करने और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मांगा ब्योरा
रामगोपाल यादव के आरोपों पर उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रतिक्रिया देते हुए विशिष्ट जानकारी मांगी है। उन्होंने एक्स पर कहा कि यदि प्रदेश के किसी विधानसभा क्षेत्र में निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) को लेकर ऐसी कोई शिकायत या संदेह है, तो उसकी जानकारी दी जाए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शिकायत मिलने पर तत्काल जांच कर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
चुनाव से पहले SIR पर बढ़ी राजनीतिक हलचल
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी पहले भी चुनावी प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाती रही है, जबकि निर्वाचन अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज किया है।
मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रक्रिया को लेकर उठे इन सवालों के बीच अब सबकी नजर निर्वाचन आयोग की जांच और संबंधित पक्षों की ओर से उपलब्ध कराए जाने वाले साक्ष्यों पर है। फिलहाल रामगोपाल यादव के आरोपों पर जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।



