अखिलेश के सामने सपा की गुटबाजी खुलकर सामने आई, सांसद रुचि वीरा और विधायक कमाल अख्तर में तीखी बहस
लखनऊ में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के सामने मुरादाबाद इकाई की गुटबाजी खुलकर सामने आ गई। सांसद रुचि वीरा और विधायक कमाल अख्तर के बीच तीखी बहस के बाद पार्टी नेतृत्व ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
लखनऊ। समाजवादी पार्टी की मुरादाबाद इकाई में लंबे समय से चल रही अंदरूनी गुटबाजी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के सामने खुलकर सामने आ गई। लखनऊ में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र की सांसद रुचि वीरा और कांठ विधायक कमाल अख्तर आमने-सामने आ गए, जिसके बाद माहौल काफी गर्म हो गया।
बैठक में दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर संगठनात्मक उपेक्षा और गुटबाजी को बढ़ावा देने जैसे गंभीर आरोप लगाए। बातचीत के दौरान स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि स्वयं पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को हस्तक्षेप कर मामला शांत कराना पड़ा।
बैठक में उठे संगठनात्मक मतभेद
सूत्रों के अनुसार बैठक में राज्यसभा सांसद जावेद अली, पूर्व विधायक यूसुफ अंसारी, जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह यादव और अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। इसी दौरान सांसद रुचि वीरा ने आरोप लगाया कि उन्हें पार्टी के स्थानीय कार्यक्रमों में नजरअंदाज किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कई आयोजनों में न तो उनकी तस्वीर लगाई जाती है और न ही उन्हें आमंत्रित किया जाता है, जिससे संगठनात्मक समन्वय पर सवाल उठते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे हालात में पार्टी को विपक्ष के हमलों का सामना करने में कठिनाई होती है।
सांसद और विधायक में तीखी बहस
बैठक के दौरान सांसद प्रतिनिधि खुशनूद अली और विधायक कमाल अख्तर के बीच भी बहस हो गई। आरोप-प्रत्यारोप के बीच मामला और गरमा गया। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर गुटबाजी फैलाने और संगठन को कमजोर करने के आरोप लगाए।
सांसद ने अपने प्रतिनिधि को लेकर भी नाराजगी जताई और कहा कि पार्टी में सभी नेताओं को समान सम्मान मिलना चाहिए।
अखिलेश यादव का हस्तक्षेप
स्थिति को बिगड़ते देख सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने हस्तक्षेप किया और दोनों पक्षों की बात विस्तार से सुनी। उन्होंने नेताओं से संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने और आपसी मतभेदों को सुलझाने की अपील की।
बैठक के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी में अनुशासन सर्वोपरि है।
मिशन 2027 पर असर की आशंका
पार्टी के अंदर मुरादाबाद इकाई की यह खींचतान ऐसे समय सामने आई है जब समाजवादी पार्टी 2027 के चुनावी मिशन की तैयारी में जुटी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की गुटबाजी संगठनात्मक मजबूती के लिए चुनौती बन सकती है।
दोनों नेताओं का बयान
बैठक के बाद सांसद रुचि वीरा ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने पूरी बात रखी है और निष्पक्ष जांच का भरोसा मिला है। वहीं विधायक कमाल अख्तर ने कहा कि उन्होंने अपना पक्ष स्पष्ट रूप से रखा है और पार्टी नेतृत्व के निर्णय का पालन करेंगे।
लखनऊ की इस बैठक ने समाजवादी पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी को सार्वजनिक रूप से उजागर कर दिया है। अब सभी की नजरें पार्टी नेतृत्व की जांच रिपोर्ट और संभावित संगठनात्मक कार्रवाई पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि इस विवाद का राजनीतिक असर कितना गहरा होगा।




