फैटी लिवर बीमारी पर जागरूकता बढ़ाने की बड़ी पहल, SGPGIMS लखनऊ में हुआ आयोजन
हर तीसरा भारतीय फैटी लिवर से प्रभावित, जीवनशैली सुधार को बताया सबसे बड़ा उपाय
SGPGIMS लखनऊ में ग्लोबल NASH दिवस 2026 के अवसर पर फैटी लिवर रोग (NASH/MASH) पर विशेषज्ञों ने चिंता जताई। डॉक्टरों ने बताया कि हर तीसरा भारतीय प्रभावित है और जीवनशैली में सुधार ही इसका सबसे बड़ा समाधान है।
लखनऊ। फैटी लिवर रोग को लेकर जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर वर्ष जून के दूसरे गुरुवार को मनाया जाने वाला ग्लोबल NASH दिवस (Global NASH Day) इस वर्ष भी लखनऊ में विशेष कार्यक्रम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर SGPGIMS (संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान) के हेपेटोलॉजी विभाग ने एक शैक्षणिक और जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया।
कार्यक्रम का उद्घाटन और विशेषज्ञों की मौजूदगी
इस कार्यक्रम का उद्घाटन SGPGI के डीन प्रोफेसर शालीन कुमार, हेपेटोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अमित गोयल, KGMU के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर सुमित रुंगटा, BHU-IMS के प्रोफेसर देवेश यादव तथा GSVM कानपुर के प्रोफेसर विनय कुमार सहित कई प्रमुख विशेषज्ञों ने किया।
विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में फैटी लिवर बीमारी तेजी से बढ़ रही है और अब यह एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है।
फैटी लिवर और NASH क्या है?
फैटी लिवर बीमारी का गंभीर रूप NASH (Non-Alcoholic Steatohepatitis) कहलाता है, जिसे अब चिकित्सा जगत में MASH (Metabolic Dysfunction-Associated Steatohepatitis) भी कहा जा रहा है।
डॉक्टरों के अनुसार, यह एक जीवनशैली से जुड़ी बीमारी है, जो धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचाकर सिरोसिस और लिवर कैंसर तक का कारण बन सकती है।
भारत में बढ़ता खतरा: हर तीसरा व्यक्ति प्रभावित
विशेषज्ञों ने चिंता जताई कि भारत में लगभग हर तीसरा व्यक्ति फैटी लिवर से प्रभावित है। मोटापा, डायबिटीज और निष्क्रिय जीवनशैली इसके प्रमुख कारण बताए गए।
डॉक्टरों ने कहा कि भारत आज मोटापा और डायबिटीज की वैश्विक राजधानी बनता जा रहा है, जिससे भविष्य में फैटी लिवर के मामले और तेजी से बढ़ सकते हैं।
रोकथाम ही सबसे बड़ा इलाज
SGPGI के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर आर.के. धीमन ने कहा कि NASH पूरी तरह जीवनशैली आधारित बीमारी है। इसे रोका जा सकता है यदि लोग—
- नियमित व्यायाम करें
- स्वस्थ वजन बनाए रखें
- संतुलित आहार लें
- फलों, सब्जियों और साबुत अनाज का सेवन बढ़ाएं
युवा डॉक्टरों की भागीदारी और प्रशिक्षण
इस अवसर पर हेपेटोलॉजी विभाग के डॉ. अजय कुमार मिश्रा और डॉ. सुरेंद्र सिंह ने पोस्टग्रेजुएट क्विज़ का आयोजन किया, जिसमें राज्यभर से 100 से अधिक युवा डॉक्टरों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में फैटी लिवर, NASH के निदान और उपचार पर व्यावहारिक प्रशिक्षण (hands-on training) भी दिया गया।
ग्लोबल NASH दिवस का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि लोगों को जीवनशैली में सुधार के लिए प्रेरित करना भी है। विशेषज्ञों ने स्पष्ट संदेश दिया कि समय रहते पहचान और रोकथाम से इस गंभीर बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है और देश में बढ़ते लिवर रोग के बोझ को कम किया जा सकता है।


