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ईरान के विदेश मंत्री का बड़ा बयान: ओमान पर हमला हमारी मर्जी से नहीं हुआ

“ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ओमान पर हमला उनकी मर्जी से नहीं हुआ। IRGC अब स्वतंत्र रूप से अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जवाबी हमलों में काम कर रहा है।”

नई दिल्ली। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोमवार को एक चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ हाल के जवाबी हमलों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) स्वतंत्र रूप से काम कर रहा है और ओमान पर किया गया हमला ईरानी सरकार की मर्जी से नहीं था

IRGC की स्वतंत्रता और कार्यप्रणाली

IRGC को ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के आदेशों के तहत काम करने के लिए जाना जाता था। अब खामेनेई की अमेरिकी-इज़रायली हमलों के दौरान मौत के बाद, IRGC सुप्रीम लीडर के सीधे नियंत्रण के बिना कार्यरत है।

अराघची ने कहा, “असल में हमारी मिलिट्री यूनिट्स अब स्वतंत्र हैं और पहले दिए गए निर्देशों के अनुसार काम कर रही हैं। ओमान में जो स्ट्राइक हुई, वह हमारी मर्जी से नहीं हुई थी। हमने अपनी आर्म्ड फोर्सेज को पहले ही चेतावनी दी थी कि वे टारगेट चुनते समय सावधान रहें।”

IRGC की स्थापना मई 1979 में ईरानी क्रांति के बाद हुई थी। रूहोल्लाह खुमैनी ने इसे पारंपरिक ईरानी सेना से अलग स्थापित किया, ताकि यह इस्लामी व्यवस्था की रक्षा और सीमा सुरक्षा के लिए विशेष रूप से काम कर सके। इसके तहत IRGC ने हमेशा ईरानी सरकार और सुप्रीम लीडर के निर्देशों का पालन किया।

ओमान हमला और वैश्विक असर

बीबीसी और अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हाल के हमलों में IRGC ने ओमान पोर्ट पर स्ट्राइक की। इस हमले में ईरान की मिलिट्री की भूमिका विवादित बनी, क्योंकि ईरानी विदेश मंत्री के अनुसार, यह हमला सरकार की मंजूरी के बिना किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि IRGC की स्वतंत्रता का यह बयान मिडिल ईस्ट की सुरक्षा स्थिति के लिए चिंताजनक है। इससे यह संकेत मिलता है कि IRGC स्वायत्त रूप से रणनीतिक हमले और जवाबी कार्रवाइयाँ कर सकता है, जो क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकता है।

क्या कहते हैं विश्लेषक?

  1. डिप्लोमैटिक स्तर पर चुनौती: ईरानी विदेश मंत्रालय अब अपने नियंत्रण से बाहर हो रही सैन्य कार्रवाइयों को नियंत्रित करने में कठिनाई महसूस कर सकता है।

  2. संभावित अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ: अमेरिका, इज़राइल और सऊदी अरब जैसे देश IRGC की स्वतंत्रता को एक सुरक्षा खतरे के रूप में देख सकते हैं।

  3. आंतरिक राजनीतिक असर: खामेनेई के निधन के बाद IRGC की स्वतंत्र गतिविधियाँ ईरानी राजनीतिक और सैन्य संतुलन पर असर डाल सकती हैं।

अराघची के बयान से यह स्पष्ट होता है कि ईरान की मिलिट्री यूनिट्स अब पारंपरिक आदेशों के बजाय पूर्वनिर्धारित निर्देशों और रणनीति के आधार पर स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं।

ईरान के विदेश मंत्री के बयान ने वैश्विक सुरक्षा और मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव पर नई बहस शुरू कर दी है। ओमान पर हुए हमले और IRGC की स्वतंत्रता को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें अब ईरान पर टिकी हुई हैं। विश्लेषकों के अनुसार, यह स्थिति अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच संघर्ष को और पेचीदा बना सकती है।

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