लखनऊ, 20 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण) के कामकाज पर नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक) की ताजा रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विधानसभा में 19 फरवरी को पेश की गई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दो कंपनियों को कुल 255.75 करोड़ रुपये के औद्योगिक विकास कार्यों के ठेके आवंटित किए गए।
रिपोर्ट वर्ष 2017-18 से 2021-22 की अवधि से संबंधित है, हालांकि कुछ मामले इससे पहले के भी बताए गए हैं।
फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र पर 143 करोड़ के अनुबंध
सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, मेसर्स बालाजी बिल्डर को वर्ष 2015-16 में अनुभव प्रमाणपत्र का सत्यापन किए बिना ही दो निर्माण खंडों के विकास के लिए 143.22 करोड़ रुपये के 13 अनुबंध दे दिए गए। बाद में जांच में ये प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए, जिसके बाद वर्ष 2017 में अनुबंध निरस्त किए गए।
इसी प्रकार, मेसर्स आकाश इंजीनियरिंग एंड बिल्डर्स को अनुभव प्रमाणपत्र और फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) का सत्यापन किए बिना 112.53 करोड़ रुपये के ठेके आवंटित किए गए। वर्ष 2018 में फर्जीवाड़ा उजागर होने पर ये अनुबंध भी रद्द करने पड़े।
27 कार्य अपात्र ठेकेदारों को आवंटित
रिपोर्ट में कहा गया है कि ठेकेदारों की तकनीकी और वित्तीय क्षमता का समुचित आकलन नहीं किया गया। पात्रता मानकों पर खरे न उतरने वाले ठेकेदारों को 27 कार्य आवंटित कर दिए गए।
इसके अलावा—
सीएजी ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता करार दिया है।
भूमि आवंटन में भी नियमों की अनदेखी
औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि आवंटन में भी प्रक्रियागत खामियां सामने आईं।
-
मथुरा औद्योगिक क्षेत्र-बी में 3929 वर्गमीटर भूखंड 93.08 लाख रुपये में बिना आवेदन और साक्षात्कार प्रक्रिया पूरी किए आवंटित किया गया।
-
कानपुर देहात के जैनपुर औद्योगिक क्षेत्र में 5018.65 वर्गमीटर का भूखंड अपात्र आवेदक मेसर्स जय भगवती ट्रेडर्स को 1.10 करोड़ रुपये में दे दिया गया।
इन मामलों में पारदर्शिता और नियमानुसार प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने पर सवाल उठे हैं।
सदन में पेश हुई रिपोर्ट
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने 19 फरवरी को विधानसभा में सीएजी की यह रिपोर्ट पेश की। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट सदन के पटल पर रख दी गई है और आगे की कार्रवाई संबंधित विभाग के स्तर पर की जाएगी।
सीएजी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। हालांकि रिपोर्ट में अब तक किसी अधिकारी पर हुई कार्रवाई का उल्लेख नहीं है।
सियासी घमासान तेज
विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा है और इसे सरकारी तंत्र में व्याप्त अनियमितताओं का उदाहरण बताया है। वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि यह मामले पूर्ववर्ती अवधि से जुड़े हैं और वर्तमान सरकार पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
पारदर्शिता पर बड़ा सवाल
सीएजी की रिपोर्ट ने औद्योगिक विकास परियोजनाओं में निगरानी, सत्यापन और वित्तीय अनुशासन की आवश्यकता को रेखांकित किया है। सार्वजनिक धन के उपयोग और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर यह मामला आने वाले दिनों में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का केंद्र बना रह सकता है।