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प्रयागराज विवाद के बाद उत्तराखंड से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को मिला सम्मान

INVITATION TO AVIMUKTESHWARANAND: “बदरीनाथ धाम की गाडू घड़ा यात्रा में शामिल होने के लिए शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को निमंत्रण मिला है। कपाट उद्घाटन से पहले इसे बड़ा धार्मिक संकेत माना जा रहा है।”

चमोली। श्री बदरीनाथ धाम से जुड़ी पुजारी समुदाय की शीर्ष संस्था श्री बदरीनाथ डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को भगवान बदरी विशाल के तेल कलश यानी गाडू घड़ा यात्रा में शामिल होने का आग्रह किया है। यह यात्रा बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले की सबसे महत्वपूर्ण परंपराओं में मानी जाती है।

डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के अध्यक्ष पंडित आशुतोष डिमरी ने बताया कि, “हमारी ओर से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज को गाडू घड़ा यात्रा में सम्मिलित होने का विधिवत निमंत्रण भेजा गया है। यह न्योता बदरीनाथ धाम के पुजारी समुदाय की ओर से है।”

पद विवाद के बीच बड़ा धार्मिक संकेत

धार्मिक जानकारों का मानना है कि गाडू घड़ा यात्रा में शंकराचार्य को आमंत्रित किया जाना उनके शंकराचार्य पद को लेकर चल रहे विवादों के बीच एक स्पष्ट धार्मिक संदेश देता है। गौरतलब है कि आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार पीठों में उत्तर दिशा की पीठ ज्योतिर्मठ (बदरीनाथ धाम) है, जहां स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य के रूप में विराजमान हैं।

 क्या है गाडू घड़ा परंपरा?

गाडू घड़ा यात्रा बदरीनाथ धाम की एक प्राचीन पौराणिक परंपरा है। कपाट खुलने से पहले नरेंद्र नगर के राज दरबार में महारानी के नेतृत्व में सुहागिन महिलाएं पारंपरिक तरीकों से तिलों का तेल निकालती हैं।
इस तेल का प्रयोग भगवान बदरी विशाल के लेप और अखंड ज्योति में किया जाता है। विशेष बात यह है कि इस प्रक्रिया में किसी भी मशीन का उपयोग नहीं किया जाता, बल्कि सिलबट्टे, कोल्हू और हाथों से तेल पिरोया जाता है।

तेल तैयार होने के बाद इसे एक धार्मिक यात्रा के रूप में ऋषिकेश से बदरीनाथ धाम तक ले जाया जाता है, जिसे गाडू घड़ा यात्रा कहा जाता है।

 23 अप्रैल को खुलेंगे बदरीनाथ धाम के कपाट

इस वर्ष बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 को ब्रह्म मुहूर्त में प्रातः 6:15 बजे श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोले जाएंगे। कपाट खुलने की तिथि की घोषणा नरेंद्र नगर राज दरबार में पारंपरिक विधि से राजपुरोहित आचार्य कृष्ण प्रसाद उनियाल ने ग्रह-नक्षत्रों की गणना के बाद की थी।
इससे पहले 7 अप्रैल 2026 से गाडू घड़ा यात्रा आरंभ होगी।

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