यूपी विधानसभा में शिक्षामित्रों को 5 लाख तक कैशलेस इलाज की मंजूरी
“UP Budget Session 2026 में लखनऊ विधानसभा के दौरान बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह ने शिक्षामित्रों के मानदेय, कैशलेस चिकित्सा सुविधा और ग्राम पंचायत तैनाती पर सरकार का पक्ष रखा। सरकार ने 3500 से बढ़ाकर 10,000 रुपये मानदेय करने का जिक्र किया और आगे भी हित में निर्णय लेने की बात कही।”
लखनऊ। यूपी विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान बुधवार को प्रश्नकाल में शिक्षामित्रों के मानदेय, कैशलेस चिकित्सा सुविधा और ग्राम पंचायतों में तैनाती का मुद्दा जोरदार ढंग से उठा। इस पर बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह ने सदन में सरकार का पक्ष रखा।
शिक्षामित्रों के हित में सरकार का आश्वासन
मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग के लिए शिक्षामित्रों की सेवाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) का कार्य चल रहा है, जिसमें शिक्षामित्र अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। यह प्रक्रिया पूरी होते ही उन्हें ग्राम पंचायतों में तैनात किया जाएगा। इस संबंध में सरकार आदेश जारी कर चुकी है।
कैशलेस इलाज की सुविधा मंजूर
सदन में मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि शिक्षामित्रों, शिक्षकों और अनुदेशकों को पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की मांग सरकार ने स्वीकार कर ली है। इसे शिक्षामित्रों के हित में बड़ा कदम बताया जा रहा है।
मानदेय वृद्धि पर सपा सरकार पर निशाना
मानदेय बढ़ाने के सवाल पर संदीप सिंह ने कहा कि 2012 से 2017 तक सपा सरकार के कार्यकाल में शिक्षामित्रों का मानदेय नहीं बढ़ाया गया। उन्होंने दावा किया कि जब वर्तमान सरकार सत्ता में आई तब शिक्षामित्रों को 3,500 रुपये मानदेय मिलता था, जिसे बढ़ाकर 10,000 रुपये किया गया।
मंत्री ने कहा, “हमारी सरकार शिक्षामित्रों के प्रति संवेदनशील है और आगे भी उनके हित में निर्णय लिए जाएंगे।”
ऊर्जा मुद्दे पर भी गरमाया सदन
बजट सत्र के दौरान बिजली आपूर्ति और मुफ्त बिजली का मुद्दा भी चर्चा में रहा। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने किसानों को मुफ्त बिजली और कनेक्शन देने का दावा किया, जिस पर सपा नेताओं ने आपत्ति जताई। सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने मंत्री के बयान पर नाराजगी जताते हुए कहा कि पूर्व सरकारों के कार्यों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
इसके अलावा नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने मेरठ में गांधी आश्रम की जमीन पर अतिक्रमण का मुद्दा उठाया, जिस पर वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार जमीन को अपने पक्ष में अधिग्रहित करने की दिशा में कानूनी प्रक्रिया शुरू कर चुकी है।




