देवरिया वक्फ मजार पर बुलडोजर एक्शन: राष्ट्रपति सचिवालय ने लिया संज्ञान
“देवरिया मजार ध्वस्तीकरण मामला राष्ट्रपति सचिवालय तक पहुंचा। यूपी मुख्य सचिव को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश, पूर्व सांसद आस मोहम्मद की शिकायत पर बढ़ी हलचल।”
देवरिया। देवरिया जिले में बंजर भूमि पर बने वक्फ मजार के एक हिस्से को ढहाए जाने का मामला अब राष्ट्रपति सचिवालय तक पहुंच गया है। राष्ट्रपति सचिवालय ने इस गंभीर प्रकरण का संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।
पूर्व राज्यसभा सदस्य आस मोहम्मद ने 16 जनवरी को राष्ट्रपति को शिकायती पत्र सौंपते हुए आरोप लगाया था कि सूफी संत गनी शाह बाबा की मजार वर्षों पुरानी है और उप्र सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में पंजीकृत है। उन्होंने दावा किया कि कुछ संगठनों के दबाव में प्रशासन ने मजार को अवैध बताकर बुलडोजर कार्रवाई की।
प्रशासन पर दबाव में कार्रवाई का आरोप
आस मोहम्मद का कहना है कि बीते कुछ महीनों से मजार हटाने का दबाव बनाया जा रहा था। इसी क्रम में भूमि को सरकारी बंजर घोषित कर मजार के एक हिस्से को ध्वस्त कर दिया गया। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग भी सक्रिय
मजार प्रकरण को लेकर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने भी जिला प्रशासन से रिपोर्ट तलब की है। प्रशासन का कहना है कि आयोग को तथ्यात्मक रिपोर्ट भेजने की तैयारी की जा रही है।
प्रशासन का पक्ष
तहसील प्रशासन के अनुसार, गोरखपुर रोड स्थित रेलवे ओवरब्रिज के पास मेहड़ा नगर क्षेत्र में यह मजार नान-जेड ए श्रेणी की बंजर भूमि पर बनाई गई थी। वर्ष 1399 फसली की खतौनी में भूमि बंजर दर्ज है।
प्रशासन का दावा है कि वर्ष 1993 में कथित फर्जी आदेश के आधार पर मजार और कब्रिस्तान का इंद्राज कराया गया था, जिसे जून 2025 में यूपी राजस्व संहिता 2006 के तहत निरस्त कर दिया गया। इसके बाद आरबीओ एक्ट की धारा-10 के अंतर्गत सक्षम प्राधिकारी के आदेश पर 11 जनवरी 2026 को मजार के गुंबद व अन्य निर्माण हटाए गए।



