जनजीवन में सकारात्मक बदलाव ही सुशासन की असली कसौटी: सीएम योगी
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव से प्रशासन की सार्थकता सिद्ध होती है। लखनऊ में साधना शृंखला-2026, मिशन कर्मयोगी और सुशासन पर दिया जोर।
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जनमानस के जीवन में आने वाले सकारात्मक परिवर्तन से ही प्रशासन की सार्थकता सिद्ध होती है। प्रशासन का वास्तविक उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना और सरकारी प्रक्रियाओं को पूरा करना नहीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन में बेहतर बदलाव लाना है। जब प्रशासनिक तंत्र दक्ष, संवेदनशील और उत्तरदायी होता है, तभी शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचता है। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को साधना शृंखला-2026 के आयोजन के अवसर पर यह संदेश देते हुए सुशासन, जनकल्याण और प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में सुधार पर जोर दिया।
लोक सेवक हैं सकारात्मक बदलाव के सबसे महत्वपूर्ण संवाहक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपने संदेश में कहा कि लोक सेवक जनमानस के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के सबसे महत्वपूर्ण संवाहक हैं। उनकी कार्यशैली, निर्णय लेने की क्षमता और जनता के प्रति संवेदनशीलता से ही सरकारी योजनाओं का प्रभाव जमीन पर दिखाई देता है। उन्होंने साधना शृंखला-2026 के आयोजन के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सुशासन का संकल्प तभी साकार होगा, जब प्रशासनिक व्यवस्था जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देगी।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी दक्षता और जवाबदेही के साथ करना चाहिए। सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुंचे और आम नागरिक को सरकारी कार्यालयों में अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े, यही प्रभावी प्रशासन की पहचान है।
2017 से पहले की कार्यसंस्कृति पर मुख्यमंत्री ने उठाए सवाल
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा कि उस दौर में परिवारवाद, तुष्टीकरण और भ्रष्टाचार को प्राथमिकता मिलने से प्रदेश की प्रशासनिक दक्षता, कार्यकुशलता और कार्यसंस्कृति प्रभावित हुई थी। उनके अनुसार, अपराध, माफियाराज और नीतिगत उदासीनता के कारण प्रदेश की असीम संभावनाओं का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा था।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए कार्यसंस्कृति में बदलाव जरूरी है। शासन और प्रशासन की प्राथमिकता जनता की समस्याओं का समाधान करना तथा विकास योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करना होनी चाहिए। सरकार की ओर से किए जा रहे बदलावों का वास्तविक मूल्यांकन इस आधार पर होना चाहिए कि उनका लाभ आम लोगों तक कितना पहुंच रहा है।
मिशन कर्मयोगी से प्रशासनिक व्यवस्था को नई दिशा
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में संचालित मिशन कर्मयोगी जैसी पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके माध्यम से देश की प्रशासनिक कार्यसंस्कृति को नई दिशा मिल रही है। प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने, उनके कौशल को विकसित करने तथा नागरिक-केंद्रित कार्यप्रणाली को प्रोत्साहित करने में ऐसे प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में अपनी पुरानी छवि से बाहर निकलकर विकास की नई दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास किया है। प्रदेश में प्रशासनिक, आर्थिक और संस्थागत ढांचे को नए सिरे से मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रशासनिक सुधारों के साथ जवाबदेही और कार्यकुशलता को भी प्राथमिकता देना आवश्यक है।
लखनऊ में दो दिवसीय साधना शृंखला-2026 का आयोजन
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में बदलाव की इस पहल को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से राजधानी लखनऊ में दो दिवसीय क्षेत्रीय साधना शृंखला-2026 का आयोजन किया जा रहा है। उनके संदेश के अनुसार, कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। इसमें आठ राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों की सहभागिता प्रस्तावित है।
इस आयोजन का उद्देश्य प्रशासनिक क्षमता, कार्यकुशलता और सुशासन से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श को आगे बढ़ाना है। विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी से प्रशासनिक अनुभवों और बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा करने का अवसर मिलेगा।
‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ पर जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार का प्रयास ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें सरकारी प्रक्रियाएं सरल हों, प्रशासनिक कामकाज प्रभावी बने और जनता को समय पर सेवाएं मिलें। उन्होंने कहा कि अंत्योदय की भावना के अनुरूप विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि कर्मयोगी उत्तर प्रदेश विकसित भारत के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। साधना शृंखला-2026 जैसे आयोजनों से प्रशासनिक व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव को गति मिलने और जनकल्याण के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
जनता के जीवन में बदलाव से ही साबित होगी प्रशासन की सफलता
मुख्यमंत्री के संदेश का मूल भाव यही रहा कि प्रशासन की सफलता का आकलन केवल सरकारी योजनाओं, बैठकों या नीतिगत घोषणाओं से नहीं किया जा सकता। इसका वास्तविक पैमाना यह है कि आम नागरिक को इन प्रयासों से कितना लाभ मिल रहा है। जनता की समस्याओं का समय पर समाधान, सरकारी सेवाओं की सुलभता, पारदर्शिता और अधिकारियों की जवाबदेही सुशासन के महत्वपूर्ण आधार हैं।
साधना शृंखला-2026 के माध्यम से प्रशासनिक कार्यसंस्कृति को अधिक सक्षम और नागरिक-केंद्रित बनाने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने आयोजन की सफलता के लिए शुभकामनाएं देते हुए विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में उत्तर प्रदेश की सक्रिय भूमिका का संकल्प दोहराया।



