CJP Protest 2.0: पुलिस कार्रवाई के बावजूद आंदोलन जारी रखने का ऐलान, नेहा बोरा समेत कई हिरासत में

दिल्ली में CJP Protest 2.0 के दौरान अभिजीत दिपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका रिहा। नेहा बोरा समेत कई हिरासत में, पुलिस कार्रवाई के बावजूद आंदोलन जारी रखने का ऐलान।
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध में दिल्ली में जारी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन ने रविवार को भी राजनीतिक माहौल गरमा दिया। पुलिस कार्रवाई और बड़े पैमाने पर हिरासत के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। रविवार को नेहा बोरा समेत कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया।
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके, सह-संयोजक सौरभ दास और आशुतोष रांका को रविवार को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए जाने के बाद रिहा कर दिया गया। पुलिस के अनुसार, तीनों को शांति और अच्छे व्यवहार की शर्त पर एक वर्ष के लिए 50 हजार रुपये का जमानत बांड भरने के बाद रिहा किया गया। वहीं, यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी शनिवार को हिरासत में लिए जाने के बाद देर रात छोड़ दिया गया।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान
CJP ने रविवार सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पर दोबारा प्रदर्शन करने का आह्वान किया था। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करते हुए कई इलाकों में बैरिकेडिंग की और प्रदर्शनकारियों को विभिन्न स्थानों पर रोका। कनॉट प्लेस और आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन के आसपास भी पुलिस ने कार्रवाई की। नेहा बोरा को कनॉट प्लेस से हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई।
दिल्ली में निषेधाज्ञा लागू रहने के कारण नई दिल्ली और मध्य दिल्ली के कई मार्गों पर यातायात प्रभावित रहा। जंतर-मंतर, इंडिया गेट और कनॉट प्लेस सहित संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बल तैनात किए गए। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस और अर्धसैनिक बलों की व्यापक तैनाती की गई थी।
विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सख्त कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष नागरिक अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर अपना विरोध जारी रखेगा। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और नेता गोपाल राय ने भी केंद्र सरकार तथा दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर महिला प्रदर्शनकारी के साथ कथित मारपीट की निंदा की। विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शनकारियों, छात्रों और महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार की जांच की मांग उठाई।
सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था का किया बचाव
दिल्ली सरकार ने प्रदर्शन के दौरान लगाए गए प्रतिबंधों को सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विपक्षी दलों पर प्रदर्शन के नाम पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया।
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने प्रदर्शनकारियों, वकीलों, पत्रकारों और नागरिक समाज के सदस्यों की सामूहिक हिरासत की खबरों पर चिंता जताई। भारत के विदेश मंत्रालय ने इन टिप्पणियों को निराधार बताते हुए कहा कि देश में शांतिपूर्ण सभा का अधिकार कानून और सार्वजनिक व्यवस्था से संबंधित उचित प्रतिबंधों के अधीन है।
CJP नेताओं ने स्पष्ट किया है कि ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रहेगा। वहीं, विपक्षी दलों ने 12 अक्टूबर को प्रस्तावित इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन और मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपने की योजना की भी घोषणा की है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और बढ़ने की संभावना है।



