उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत, अक्टूबर के बिल में 5% से ज्यादा कमी के आसार

उत्तर प्रदेश में अक्टूबर 2026 के बिजली बिल में 5% से अधिक कमी की संभावना है। जुलाई के ईंधन अधिभार शुल्क में कमी से करीब 3.73 करोड़ उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए अक्टूबर 2026 में भी राहत की संभावना है। UP Electricity Bill में अगले महीने पांच प्रतिशत से अधिक की कमी आ सकती है। जुलाई के ईंधन अधिभार शुल्क यानी Fuel Surcharge में कमी का असर सितंबर में इस्तेमाल की गई बिजली के अक्टूबर में जारी होने वाले बिल पर दिखाई दे सकता है।
करीब 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिलने की संभावना है। पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की ओर से इस संबंध में जल्द आदेश जारी किए जाने की प्रक्रिया चल रही है।
जुलाई के फ्यूल सरचार्ज में कमी से मिलेगी राहत
एफपीपीसीए यानी Fuel and Power Purchase Cost Adjustment (FPPCA) व्यवस्था के तहत बिजली खरीद और उससे जुड़ी लागत में बदलाव के आधार पर उपभोक्ताओं से लिए जाने वाले अधिभार का निर्धारण किया जाता है। जुलाई की लागत के आधार पर फ्यूल सरचार्ज में कमी का असर अक्टूबर के बिजली बिल में पड़ने की संभावना है।
इससे सभी श्रेणियों के बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। हालांकि अंतिम राहत कितनी होगी, यह पावर कॉरपोरेशन के आधिकारिक आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।
लगातार चौथे महीने कम हो सकता है बिजली बिल
उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को पिछले कुछ महीनों से अधिभार में बदलाव के कारण बिल में राहत मिल रही है। जून में 10 प्रतिशत अतिरिक्त ईंधन अधिभार लगाए जाने के बाद जुलाई में बिल में 4.43 प्रतिशत, अगस्त में 2.92 प्रतिशत और सितंबर में रिकॉर्ड 7.93 प्रतिशत की कमी का असर देखा गया।
अब अक्टूबर में भी पांच प्रतिशत से अधिक की संभावित कमी से उपभोक्ताओं को लगातार चौथे महीने राहत मिल सकती है।
जून में 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क को लेकर हुआ था विवाद
जून में बिजली उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत अतिरिक्त ईंधन अधिभार शुल्क वसूला गया था। इसमें पुराने भुगतान को भी शामिल किए जाने को लेकर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने आपत्ति जताई थी।
करीब 1,610 करोड़ रुपये के पुराने भुगतान को अधिभार में शामिल किए जाने के मामले में आयोग ने स्पष्ट किया था कि अधिभार की गणना वास्तविक बिजली खरीद लागत और ट्रांसमिशन शुल्क के आधार पर होनी चाहिए। किसी दूसरे महीने की देनदारी के भुगतान या समायोजन को इसमें शामिल नहीं किया जा सकता।
FPPCA में पारदर्शिता से उपभोक्ताओं को लाभ
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा के अनुसार, एफपीपीसीए की गणना में पारदर्शिता बढ़ने से उपभोक्ताओं को निर्धारित नियमों के अनुसार राहत का लाभ समय पर मिल रहा है।
अक्टूबर में प्रस्तावित राहत भी इसी गणना प्रक्रिया से जुड़ी है। पावर कॉरपोरेशन के आदेश के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि अलग-अलग श्रेणियों के उपभोक्ताओं के बिल पर वास्तविक प्रभाव कितना पड़ेगा।
उपभोक्ताओं के लिए इसका क्या मतलब?
यदि अक्टूबर में पांच प्रतिशत से अधिक की कटौती लागू होती है तो सितंबर में खपत की गई बिजली के बिल में उपभोक्ताओं को इसका सीधा लाभ मिल सकता है। इसका दायरा घरेलू सहित विभिन्न श्रेणियों के करीब 3.73 करोड़ उपभोक्ताओं तक होने की संभावना है।




