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‘AI साक्षरता आज के समय की बड़ी मांग’, सीएम योगी ने प्रदेशवासियों के नाम लिखी पाती

सीएम योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस और अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर प्रदेशवासियों के नाम पाती लिखी। उन्होंने AI साक्षरता को समय की मांग बताते हुए शिक्षा, तकनीक और कौशल पर जोर दिया।

नई दिल्ली/लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस और आगामी अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस (8 सितंबर) के अवसर पर प्रदेशवासियों के नाम एक पाती लिखकर शिक्षा, गुरु-शिष्य परंपरा, तकनीकी नवाचार और भविष्य की प्राथमिकताओं पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि बदलते तकनीकी दौर में केवल डिजिटल साक्षरता पर्याप्त नहीं है, बल्कि AI साक्षरता भी आज के समय की बड़ी मांग बन गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल बच्चों को पढ़ना-लिखना सिखाना नहीं, बल्कि उनमें ज्ञान, संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और जीवन को सही दिशा देने की समझ विकसित करना है। उन्होंने कहा कि ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह जीवन को सरल बनाने के साथ समाज के लिए उपयोगी साबित हो।

81 गुरुजनों के सम्मान का किया उल्लेख

सीएम योगी ने शिक्षक दिवस के अवसर पर राष्ट्र निर्माण की नींव मजबूत करने वाले 81 गुरुजनों को सम्मानित करने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरुकुल केवल शिक्षा हासिल करने के केंद्र नहीं थे, बल्कि वहां विद्यार्थियों को जीवन मूल्यों, जिम्मेदारियों और सामाजिक दायित्वों की भी शिक्षा दी जाती थी।

मुख्यमंत्री के अनुसार, गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण विशेषता रही है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य विद्यार्थी को केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उसे जिम्मेदार और सक्षम नागरिक बनाना है।

शिक्षा का उद्देश्य केवल पढ़ना-लिखना नहीं

मुख्यमंत्री ने अपनी पाती में कहा कि बच्चे केवल पढ़ना-लिखना सीखने के लिए विद्यालय नहीं जाते। शिक्षा के माध्यम से उनके भीतर ज्ञान, संस्कार, अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित होना चाहिए। साथ ही उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने और सही दिशा चुनने की समझ भी मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को बदलती दुनिया की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना भी जरूरी है। इसी दृष्टि से सरकार शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीक और कौशल से जोड़ने पर जोर दे रही है।

ऑपरेशन कायाकल्प और मिशन प्रेरणा का जिक्र

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन कायाकल्प, मिशन प्रेरणा, मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यालयों की सुविधाओं और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध अवसरों में सुधार किया गया है।

उन्होंने दावा किया कि इन प्रयासों से प्रदेश के विद्यालयों में ड्रॉपआउट दर को न्यूनतम करने में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक बच्चे विद्यालय पहुंचें और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो।

डिजिटल साक्षरता के साथ AI ज्ञान भी जरूरी

बदलती तकनीक के दौर का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज डिजिटल साक्षरता के साथ AI साक्षरता समय की मांग है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डीप-टेक और दूसरी उभरती प्रौद्योगिकियां शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में नए अवसर पैदा कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में तकनीकी बदलावों के साथ कदम मिलाकर चलने के लिए युवाओं को नई तकनीकों की जानकारी और उनका उपयोग करने का कौशल हासिल करना होगा। इसी उद्देश्य से पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान, तकनीक, नवाचार और कौशल से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

लखनऊ की AI City और कानपुर के ड्रोन-UAV इकोसिस्टम का उल्लेख

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश में विकसित हो रहे तकनीकी इकोसिस्टम का भी उल्लेख किया। उन्होंने लखनऊ में बन रही AI City और कानपुर में विकसित हो रहे ड्रोन-UAV तकनीक के इकोसिस्टम को प्रदेश के तकनीकी भविष्य की नई संभावनाओं का आधार बताया।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और नवाचार को शिक्षा तथा कौशल विकास से जोड़कर युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए रास्ते तैयार किए जा सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर सीएम का संकल्प

8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि साक्षरता का लक्ष्य केवल सरकार के प्रयासों से पूरा नहीं हो सकता। इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी जरूरी है।

उन्होंने संकल्प दोहराया कि प्रदेश में हर बच्चा विद्यालय पहुंचे, हर विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, हर युवा कौशल और नवाचार से जुड़े तथा हर नागरिक साक्षर होने के साथ डिजिटल और AI ज्ञान से भी परिचित हो।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा और साक्षरता केवल व्यक्तिगत विकास का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके जरिए समाज और प्रदेश के समग्र विकास की नींव मजबूत होती है।

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