लखनऊ अग्निकांड: भारी सुरक्षा के बीच ढहाई जा रही अवैध बिल्डिंग, तीन बुलडोजर और सैकड़ों जवान तैनात
22 जून के भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद एलडीए ने अलीगंज स्थित अवैध चार मंजिला व्यावसायिक इमारत को ध्वस्त करना शुरू कर दिया। तीन बुलडोजर, 100 से अधिक पुलिसकर्मी और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कार्रवाई जारी है।
लखनऊ। लखनऊ अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के बाद आखिरकार हादसे वाली अवैध चार मंजिला व्यावसायिक इमारत पर बुलडोजर चल गया। शनिवार सुबह लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने अलीगंज के सेक्टर-डी स्थित भवन को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी। पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में लेकर तीन बुलडोजर और 100 से अधिक पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में ध्वस्तीकरण अभियान चलाया जा रहा है।
यह वही इमारत है, जहां 22 जून 2026 को भीषण आग लगने से 15 युवाओं की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। हादसे के बाद अवैध निर्माण, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।
15 दिन की मोहलत खत्म होने के बाद हुई कार्रवाई
एलडीए के विहित न्यायालय ने 10 जुलाई को भवन मालिक वीरेंद्र शुक्ल और सुरेंद्र शुक्ल को आदेश दिया था कि वे 15 दिन के भीतर अवैध निर्माण स्वयं गिरा दें। निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बावजूद भवन नहीं हटाया गया, जिसके बाद एलडीए की प्रवर्तन टीम ने शनिवार को ध्वस्तीकरण अभियान शुरू कर दिया।
अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई पूरी तरह न्यायालय के आदेश और प्राधिकरण की प्रक्रिया के तहत की जा रही है।
तीन बुलडोजर और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
ध्वस्तीकरण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पूरे क्षेत्र की बैरिकेडिंग कर दी गई है। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए 100 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।
इमारत की ऊपरी मंजिलों तक भारी मशीनें पहुंचाने के लिए पहले मलबे का अस्थायी रैंप तैयार किया गया। इसके बाद सबसे ऊपरी हिस्से से भवन को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई।
एलडीए, पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी लगातार मौके पर मौजूद रहकर पूरे अभियान की निगरानी कर रहे हैं।
एक महीने बाद भी कई सवाल कायम
22 जून की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं घटनास्थल का निरीक्षण किया था और उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए थे।
मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और एडीजी लखनऊ जोन को एसआईटी जांच की जिम्मेदारी सौंपते हुए सात दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी थी। हालांकि घटना के एक महीने बाद भी एसआईटी और एलडीए की आंतरिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो सकी है।
निलंबन हुए, लेकिन मुख्य आरोपी अब भी फरार
अग्निकांड के बाद कार्रवाई के नाम पर पांच अधिकारियों और कुछ कर्मचारियों को निलंबित किया गया। हालांकि भवन मालिक वीरेंद्र शुक्ल अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
पुलिस ने आरोपी पर घोषित इनाम बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया है। जांच एजेंसियां उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं।
15 परिवारों का दर्द आज भी ताजा
जिस स्थान पर कभी व्यावसायिक गतिविधियां होती थीं, वहां अब केवल जली हुई दीवारें और मलबा बचा है। हादसे में जान गंवाने वाले 15 युवाओं के परिवार आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल अवैध इमारत गिराने से जिम्मेदारी पूरी नहीं होगी। हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और दोषियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
अवैध निर्माण पर एलडीए की सख्ती
एलडीए का कहना है कि शहर में अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। जिन भवनों में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाएगा, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
प्राधिकरण का उद्देश्य केवल अवैध निर्माण हटाना ही नहीं, बल्कि भविष्य में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।

